किसानों ने आरोप लगाया कि वर्तमान कृषि व्यवस्था और सरकारी नीतियों के कारण उन्हें आर्थिक और मानसिक तनाव का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने सभी फसलों की न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर गारंटी के साथ खरीद सुनिश्चित करने की मांग की। किसानों का कहना है कि मंडियों में बायोमेट्रिक सत्यापन, वाहन पंजीकरण और अन्य ऑनलाइन प्रक्रियाएं अत्यधिक जटिल हैं, जिससे खरीद में अनावश्यक देरी और नुकसान हो रहा है।
गेहूं उपार्जन की तारीख में बार-बार बदलाव को लेकर किसानों ने अपनी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने मांग की कि गेहूं की खरीद 7 अप्रैल 2026 से शुरू हो और प्रति बीघा कम से कम 10 से 11 क्विंटल गेहूं खरीदा जाए, ताकि किसानों को उचित लाभ मिल सके। ज्ञापन में ऋण वसूली और फसल उपार्जन के बीच असंतुलन का मुद्दा भी प्रमुख रूप से उठाया गया। किसानों ने कहा कि जब उपार्जन अप्रैल में किया जा रहा है, तो ऋण और बिजली बकाया भुगतान के लिए कम से कम एक माह का अतिरिक्त समय दिया जाना चाहिए।
इसके अलावा, किसानों ने खाद वितरण प्रणाली में सुधार, ई-टोकन व्यवस्था को प्रभावी बनाने, यूरिया की गुणवत्ता और मात्रा में सुधार, तथा DBT प्रणाली के कारण बढ़ रहे आर्थिक बोझ को कम करने की भी मांग की। उन्होंने आलू किसानों के लिए राहत पैकेज और नरवाई प्रबंधन से जुड़ी कार्रवाई रोकने की भी मांग की।
किसानों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई, तो वे आंदोलन को और तेज करने के लिए मजबूर होंगे।