बीते चार साल में महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने अपना प्रशासनिक अनुभव तो दिखाया ही, लोगों के बीच जाकर लोगों की समस्याओं को समझा और उन्हें दूर करने की हरसंभव कोशिशें की।
इंदौर नगर निगम के महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कार्यकाल के चार वर्ष पूरे होने पर अपना रिपोर्ट कार्ड जारी करते हुए दावा किया कि नगर निगम ने केवल विकास कार्य नहीं किए, बल्कि वर्ष 2047 तक के लिए ‘अनंत इंदौर’ की नींव रखी है। उन्होंने कहा कि सीमित संसाधनों, वित्तीय दबाव और तेजी से बढ़ती आबादी के बावजूद नगर निगम ने जल, सीवरेज, सड़क, स्वच्छता, डिजिटल गवर्नेंस, पर्यावरण, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में दीर्घकालिक योजनाओं पर काम किया।
महापौर के अनुसार नगर निगम लगातार दो वर्षों तक 1,000 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व जुटाने में सफल रहा। बकाया कर वसूली, वन टाइम सेटलमेंट योजना, जीआईएस आधारित सर्वे और कर आधार बढ़ाने जैसे कदमों से वित्तीय स्थिति मजबूत हुई। उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 से 2022 के बीच के करीब 400 करोड़ रुपये के बकाया भुगतान किए गए, जबकि निगम पर अब भी 650 करोड़ रुपये से अधिक की देनदारी है।
रिपोर्ट कार्ड में देश का पहला म्युनिसिपल ग्रीन बॉन्ड जारी करने को बड़ी उपलब्धि बताया गया। इसके जरिए जलूद में 60 मेगावाट क्षमता का सोलर पार्क विकसित किया जा रहा है, जिससे बिजली खर्च कम होने और निगम के ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने का दावा किया गया।

महापौर ने कहा कि शहर की भविष्य की जरूरतों को देखते हुए 2,156 करोड़ रुपये की लागत से चार मेगा जल प्रदाय परियोजनाओं पर काम चल रहा है। इनमें 400 एमएलडी वाटर ट्रीटमेंट प्लांट, 1,650 एमएलडी इंटेक वेल, 40 नई ओवरहेड टंकियां, 1,577 किमी पाइपलाइन और 2.48 लाख नए घरेलू नल कनेक्शन शामिल हैं। इसके अलावा 84 करोड़ रुपये की 38 अन्य जल परियोजनाओं पर भी काम जारी है।
सीवरेज क्षेत्र में नगर निगम ने 122 करोड़ रुपये की लागत से सात प्रमुख परियोजनाएं पूरी करने और 30.65 किलोमीटर नई सीवर लाइन बिछाने का दावा किया। वर्तमान में शहर में 2,300 किलोमीटर से अधिक सीवर नेटवर्क, 11 एसटीपी और 436.5 एमएलडी सीवेज शोधन क्षमता उपलब्ध है। भविष्य के लिए 1,900 करोड़ रुपये की नई परियोजनाओं की योजना बनाई गई है, जिनसे 687 एमएलडी अतिरिक्त क्षमता और 450 किलोमीटर नया नेटवर्क विकसित होगा।
यातायात और आधारभूत ढांचे के तहत 800 करोड़ रुपये से अधिक की सड़क परियोजनाओं पर काम होने का दावा किया गया। इसमें 23 मास्टर प्लान सड़कें, 36 प्रमुख सड़कें, लिंक रोड, पुल-पुलिया, लेफ्ट टर्न चौड़ीकरण, मल्टीलेवल पार्किंग और बीआरटीएस हटाने जैसे कार्य शामिल हैं।
डिजिटल गवर्नेंस के तहत इंदौर को देश का पहला DigiPIN आधारित डिजिटल एड्रेस सिस्टम अपनाने वाला शहर बताया गया। साथ ही 90 लाख दस्तावेजों के डिजिटाइजेशन, जीआईएस आधारित संपत्ति सर्वे और 1,000 वर्गफीट तक के भवन नक्शों की 24 घंटे में स्वीकृति जैसी व्यवस्थाओं को भी उपलब्धियों में शामिल किया गया।

रिपोर्ट कार्ड में स्वच्छता मॉडल के विस्तार, 500 टीपीडी बायो-सीएनजी प्लांट, हरित ऊर्जा, रेन वाटर हार्वेस्टिंग, स्कूलों के आधुनिकीकरण, मेयर विद इंटर्नशिप, यूपीएससी मित्र, संजीवनी क्लिनिक, शी लाउंज, पिंक बस, 153 अवैध कॉलोनियों के नियमितीकरण और कर्मचारियों के नियमितीकरण जैसी योजनाओं का भी उल्लेख किया गया।
हालांकि महापौर का कार्यकाल विवादों से भी अछूता नहीं रहा। भागीरथपुरा जल प्रदूषण कांड, गर्मियों में जल संकट, पानी की गुणवत्ता को लेकर विवाद, बीआरटीएस हटाने में देरी, ट्रैफिक समस्याएं और निगम की वित्तीय स्थिति को लेकर विपक्ष ने लगातार सवाल उठाए। कांग्रेस ने कई मौकों पर महापौर के इस्तीफे की मांग की, जबकि नगर निगम ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए सुधारात्मक कदमों और दीर्घकालिक योजनाओं का हवाला दिया।
महापौर ने कहा कि कार्यकाल के अंतिम वर्ष में सीवर मुक्त इंदौर, अमृत-2.0, नमामि गंगे, सिंहस्थ-2028, नई जल प्रदाय परियोजनाएं, आधुनिक सड़क नेटवर्क, डिजिटल गवर्नेंस और पर्यावरण संरक्षण प्राथमिकता में रहेंगे। हालांकि इन दावों की असली परीक्षा परियोजनाओं के समय पर पूरा होने और नागरिकों को मिलने वाले वास्तविक लाभ से होगी।

