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ग्वालियर सेंट्रल जेल के अधीक्षक विदित सरवइया को जेल के कथित अंदरूनी वीडियो के नाम पर ब्लैकमेल कर लाखों रुपये की रंगदारी मांगने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। अज्ञात आरोपी ने पहले व्हाट्सएप पर चार वीडियो क्लिप भेजकर धमकाया और फिर पैसे नहीं देने पर कुछ वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर दिए। मामले में बहोड़ापुर थाना पुलिस ने शिकायत के आधार पर जांच शुरू कर दी है। जिस मोबाइल नंबर से ब्लैकमेलिंग की गई, उसे सर्विलांस पर लिया गया है।
शिकायत के अनुसार, 7 जून 2026 को दोपहर करीब 12:40 बजे जेल अधीक्षक के मोबाइल पर एक अज्ञात नंबर से कॉल और व्हाट्सएप मैसेज आए। मैसेज भेजने वाले ने दावा किया कि उसके पास जेल के भीतर के कई संवेदनशील वीडियो हैं। उसने सबूत के तौर पर चार वीडियो क्लिप भेजीं और अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते हुए लिखा कि यदि अगले दिन तक पैसे नहीं दिए गए तो सभी वीडियो वरिष्ठ अधिकारियों को भेज दिए जाएंगे।
जब जेल अधीक्षक ने आरोपी को बातचीत के लिए जेल परिसर आने को कहा तो उसने मिलने से इनकार कर दिया। इसके बजाय गांधी रोड स्थित रेस्ट हाउस में पैसे लेकर आने को कहा। अधीक्षक ने जब व्हाट्सएप पर पूछा कि कितनी रकम चाहिए, तो आरोपी ने जवाब में हाथ के पंजे (✋) का इमोजी भेजा। पुलिस इसे बड़ी रकम, संभवतः पांच लाख रुपये की मांग का संकेत मानकर जांच कर रही है।
जेल अधीक्षक ने बताया कि उन्होंने शुरुआत में ही पूरे घटनाक्रम की जानकारी अपने वरिष्ठ अधिकारियों को दे दी थी। ब्लैकमेलर की मांग नहीं मानने पर उसने सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो क्लिप वायरल कर दिए। इन वीडियो में जेल परिसर के भीतर बीड़ी, फल, सब्जी और अन्य सामान निर्धारित कीमत से 20 से 50 गुना अधिक दाम पर बिकने के दावे किए जा रहे हैं।
शिकायत में जेल अधीक्षक ने आशंका जताई है कि यह मामला सामान्य साइबर ठगी नहीं, बल्कि जेल के अंदर की रंजिश और सुनियोजित साजिश का हिस्सा हो सकता है। उन्होंने अपनी गोपनीय पड़ताल के आधार पर केंद्रीय जेल के एक निलंबित प्रहरी पवन और जेल से रिहा हो चुके आरोपी रिश्पाल सिंह की संभावित संलिप्तता का संदेह जताया है।
पुलिस के अनुसार, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि वायरल किए गए वीडियो वास्तव में ग्वालियर केंद्रीय जेल के हैं या किसी अन्य जेल के। वीडियो में समय और स्थान की पुष्टि करने वाला कोई स्पष्ट विवरण भी नहीं मिला है। जेल अधीक्षक ने कॉल लॉग, व्हाट्सएप चैट और वीडियो क्लिप सहित सभी डिजिटल साक्ष्य पेन ड्राइव में पुलिस को सौंप दिए हैं।
जेल अधीक्षक विदित सरवइया ने बताया कि 7 जून को मिले मैसेज में ट्रांसफर सीजन का हवाला देते हुए उन्हें बच नहीं पाने की चेतावनी दी गई थी। इसके बाद मुलाकात कर कुछ लेकर आने की बात कही गई, जिसे उन्होंने ब्लैकमेलिंग का प्रयास मानते हुए वरिष्ठ अधिकारियों और पुलिस को सूचना दे दी।
बहोड़ापुर थाना प्रभारी आलोक परिहार ने बताया कि जेल अधीक्षक की लिखित शिकायत के आधार पर जांच शुरू कर दी गई है। ब्लैकमेलिंग में इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबर को सर्विलांस पर रखा गया है और पूरे मामले की तकनीकी व तथ्यात्मक जांच की जा रही है।
