एंटरटेनमेंट डेस्क। हिंदी सिनेमा में जब भी बहुमुखी कलाकारों की बात होती है, तो सबसे पहले नाम आता है किशोर कुमार का। अभिनय, गायन, संगीत निर्देशन, फिल्म निर्माण और निर्देशन—हर क्षेत्र में उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई। लेकिन उनकी असली विरासत उनकी आवाज बनी, जिसने चार दशकों तक करोड़ों दिलों पर राज किया।
4 अगस्त 1929 को मध्य प्रदेश के खंडवा में जन्मे किशोर कुमार की 97वीं जयंती पर आइए जानते हैं उनकी जिंदगी के कुछ ऐसे किस्से, जो बताते हैं कि पर्दे पर लोगों को हंसाने वाला यह कलाकार असल जिंदगी में कितना अलग, संवेदनशील और अप्रत्याशित था।
1. बचपन की चोट और बदल गई आवाज की पहचान
किशोर कुमार की आवाज का अनोखा अंदाज आज भी उनकी सबसे बड़ी पहचान है। उनके बड़े भाई अशोक कुमार कई बार बता चुके थे कि बचपन में किशोर के पैर में गंभीर चोट लगी थी। दर्द के कारण वे घंटों रोते रहे। परिवार का मानना था कि इसी लंबे रोने के बाद उनकी आवाज का टेक्सचर बदल गया और वही खुरदरापन आगे चलकर उनकी गायकी की खास पहचान बन गया।

2. ‘5 रुपैया 12 आना’ का जन्म इंदौर की कैंटीन में हुआ
इंदौर के क्रिश्चियन कॉलेज में पढ़ाई के दौरान किशोर कुमार अक्सर कैंटीन में उधार पर पोहा-जलेबी खाते थे। धीरे-धीरे उनका उधार पांच रुपया बारह आना तक पहुंच गया। जब कैंटीन संचालक पैसे मांगता तो किशोर गाना गाकर बात टाल देते। बाद में फिल्म चलती का नाम गाड़ी का मशहूर गीत ‘पांच रुपैया बारह आना’ इसी किस्से से प्रेरित माना गया।
3. अभिनेता नहीं, सिर्फ गायक बनना चाहते थे
बहुत कम लोग जानते हैं कि किशोर कुमार कभी अभिनेता बनना ही नहीं चाहते थे। उनका सपना अपने आदर्श के. एल. सहगल की तरह पार्श्वगायक बनने का था। बड़े भाई अशोक कुमार पहले से फिल्म इंडस्ट्री में स्थापित थे, इसलिए उन्हें अभिनय के लगातार प्रस्ताव मिलने लगे। परिवार और परिस्थितियों के कारण उन्होंने फिल्मों में अभिनय शुरू किया, लेकिन जीवनभर कहते रहे कि उनका पहला प्यार गायकी ही रही।
4. ‘आनंद’ पहले उन्हें मिली थी, लेकिन किस्मत बदल गई
1971 में रिलीज हुई आनंद हिंदी सिनेमा की क्लासिक फिल्मों में गिनी जाती है। कम लोग जानते हैं कि निर्देशक ऋषिकेश मुखर्जी इस फिल्म में पहले किशोर कुमार को लेना चाहते थे।
एक चर्चित किस्से के मुताबिक, भुगतान विवाद के कारण किशोर ने अपने दरबान को एक बंगाली आयोजक को घर में न आने देने का निर्देश दिया था। संयोग से कहानी सुनाने पहुंचे ऋषिकेश मुखर्जी को भी दरबान ने वही व्यक्ति समझकर लौटा दिया। इससे नाराज होकर उन्होंने फिल्म में किशोर को लेने का विचार छोड़ दिया और बाद में यह भूमिका राजेश खन्ना को मिली।
हालांकि इस घटना का दूसरा संस्करण भी सामने आता है। लेखक गुलजार ने अपनी पुस्तक Actually… I Met Them में लिखा है कि फिल्म शुरू होने से पहले किशोर कुमार सिर मुंडवाकर ऋषिकेश मुखर्जी के पास पहुंचे और मजाक में बोले, “अब क्या करोगे, ऋषि?” इसके बाद निर्देशक ने नए अभिनेता की तलाश शुरू कर दी। आज भी यह स्पष्ट नहीं है कि फिल्म उनके हाथ से आखिर किस वजह से निकली।

5. कार से इतना लगाव कि उसकी मौत पर शोक मनाया
किशोर कुमार के सबसे चर्चित किस्सों में उनकी एक पुरानी कार भी शामिल है। कहा जाता है कि जब उनकी बेहद प्रिय कार पूरी तरह बेकार हो गई, तो उन्होंने उसे कबाड़ में बेचने के बजाय अपने बंगले के परिसर में दफना दिया। इतना ही नहीं, कई दिनों तक उसके लिए शोक भी मनाया। यह घटना उनके भावुक और अलग स्वभाव की मिसाल के रूप में अक्सर याद की जाती है।
क्यों आज भी अलग हैं किशोर कुमार?
किशोर कुमार सिर्फ महान गायक नहीं थे, बल्कि एक ऐसे कलाकार थे जिन्होंने अपनी शर्तों पर जिंदगी जी। कभी अपने अनोखे हास्य से लोगों को चौंकाया, तो कभी संवेदनशील फैसलों से हैरान किया। यही वजह है कि उनकी आवाज और उनके किस्से आज भी उतने ही लोकप्रिय हैं, जितने दशकों पहले थे।
