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बालाघाट में मंगलवार को जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी का 2625वां जन्म कल्याणक महोत्सव बड़े उत्साह और श्रद्धाभाव के साथ मनाया गया। इस अवसर पर सकल जैन समाज ने शहर के मुख्य मार्गों से भव्य शोभायात्रा निकाली, जिसमें चांदी के रथ और पालकी में विराजमान प्रभु के दर्शन के लिए जनसैलाब उमड़ा।
शोभायात्रा की शुरुआत श्री पार्श्वनाथ भवन से हुई और यह राजघाट चौक, महावीर चौक, हनुमान चौक होते हुए दादाबाड़ी तक पहुंची। इस वर्ष का प्रमुख आकर्षण उडुपी ढोल नृत्य और पारंपरिक बैगा गेड़ी नृत्य रहा, जिसने राहगीरों का मन मोह लिया। समारोह में महिलाएं, पुरुष और बच्चे पारंपरिक वेशभूषा में भजनों और वाद्य यंत्रों की धुन पर नृत्य करते दिखाई दिए।
शोभायात्रा से पूर्व नगर के जैन मंदिरों में स्वर्ण और रजत कलशों से भगवान महावीर का अभिषेक संपन्न हुआ। इसके बाद सामूहिक भक्तामर पाठ और विशेष पूजा-अर्चना की गई। महोत्सव समिति के अध्यक्ष आदित्य सेठिया ने भगवान महावीर के पंच सिद्धांत—सत्य, अहिंसा, अस्तेय, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह—की प्रासंगिकता पर जोर देते हुए ‘अहिंसा परमो धर्म’ का संदेश साझा किया।
चार दिवसीय महोत्सव का समापन इस समिति के आयोजन में विभिन्न सामाजिक और सेवा कार्यों के साथ हुआ। मंगलवार, 31 मार्च को हुई यह शोभायात्रा महोत्सव का मुख्य आकर्षण रही। आयोजन को सफल बनाने में समिति के सदस्यों के साथ-साथ नगर के गणमान्य नागरिकों ने भी सक्रिय योगदान दिया।
