संसद के मानसून सत्र में पेपर लीक रोकने से जुड़े परीक्षा सुधार विधेयक पर राज्यसभा में गुरुवार को तीखी बहस और हंगामा देखने को मिला। चर्चा के दौरान विपक्ष ने सरकार के प्रस्तावित कानून पर सवाल उठाए, जबकि सत्ता पक्ष ने इसे परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही लाने वाला बड़ा कदम बताया। इसी बीच, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस भी सौंपा गया।
करीब छह घंटे चली बहस में आरजेडी सांसद मनोज झा ने प्रस्तावित कानून को केवल दिखावटी सुधार करार दिया। उन्होंने कहा कि समस्या की जड़ राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) है, इसलिए केवल कानून बनाने से समाधान नहीं होगा। उन्होंने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि NTA को ही समाप्त कर देना चाहिए।
राघव चड्ढा बोले- छात्रों की आवाज सुनी गई
आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्ढा ने कहा कि NEET सहित विभिन्न परीक्षाओं में गड़बड़ियों से छात्र आक्रोशित थे और उनका गुस्सा पूरी तरह जायज था। उन्होंने कहा कि सरकार ने छात्रों की चिंताओं को गंभीरता से लिया और पहली बार पेपर लीक रोकने के लिए व्यापक कानूनी ढांचा तैयार किया है।
राघव ने कहा कि पेपर लीक मामलों में त्वरित कार्रवाई करते हुए 75 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल की गई। उनके अनुसार, नए कानून का उद्देश्य ऐसा सख्त संदेश देना है कि भविष्य में कोई भी पेपर लीक करने की हिम्मत न कर सके।
रामगोपाल यादव ने राज्यों को परीक्षा का अधिकार देने की वकालत की
समाजवादी पार्टी के सांसद प्रोफेसर रामगोपाल यादव ने कहा कि केवल सजा बढ़ाने से अपराध नहीं रुकते। उन्होंने तर्क दिया कि पहले मेडिकल प्रवेश परीक्षाएं राज्यों के स्तर पर होती थीं और उस व्यवस्था में इस तरह की बड़ी समस्याएं कम थीं। उन्होंने सुझाव दिया कि NEET जैसी परीक्षाओं के संचालन का अधिकार फिर से राज्यों को दिया जाना चाहिए।
लोकसभा में बिल पहले ही हो चुका है पारित
इससे पहले लोकसभा में करीब सात घंटे चली चर्चा के बाद पेपर लीक से संबंधित परीक्षा सुधार विधेयक पारित किया जा चुका है। अब राज्यसभा में इस पर चर्चा जारी है।
राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस

उधर, भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन और सदन की अवमानना का नोटिस सौंपा है। आरोप है कि राहुल गांधी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बारे में सदन में असंसदीय और अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया तथा बेबुनियाद आरोप लगाए।
खड़गे की टिप्पणी पर भी विवाद
राज्यसभा की कार्यवाही के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की ‘मनुस्मृति’ संबंधी टिप्पणी पर भी विवाद हुआ। सभापति के निर्देश पर उनकी इस टिप्पणी को सदन की कार्यवाही के रिकॉर्ड से हटा दिया गया।
