राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने कहा है कि स्वतंत्रता का अर्थ केवल अपनी इच्छा के अनुसार कुछ भी करने की छूट नहीं है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे आजादी के वास्तविक अर्थ को समझें और यह याद रखें कि देश को यह स्वतंत्रता लंबे संघर्ष, बलिदान और त्याग के बाद मिली है।
पुणे में आयोजित लोकमान्य तिलक पुरस्कार समारोह में सम्मानित होने के बाद डोभाल ने कहा कि नई पीढ़ी को यह समझना होगा कि स्वतंत्रता अधिकारों के साथ-साथ जिम्मेदारियों का भी नाम है।
‘राष्ट्रहित को सबसे ऊपर रखें’
डोभाल ने कहा कि युवाओं को अपने व्यक्तिगत हितों से पहले राष्ट्रहित को प्राथमिकता देनी चाहिए। यदि कभी निजी स्वार्थ और देशहित के बीच चुनाव की स्थिति आए तो राष्ट्र के हित को सर्वोपरि रखना चाहिए। उन्होंने विश्वास जताया कि इसी सोच के साथ भारत नई उपलब्धियां हासिल करेगा और इतिहास में नया अध्याय जोड़ेगा।

Gen Z पर बहस के बीच आया बयान
डोभाल का यह बयान ऐसे समय आया है, जब हाल के दिनों में जंतर-मंतर आंदोलन के दौरान वायरल हुए कुछ वीडियो और सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की सीमाओं पर राष्ट्रीय स्तर पर बहस छिड़ी हुई है। इन घटनाओं के बाद यह चर्चा तेज हुई है कि लोकतंत्र में अभिव्यक्ति की आजादी और जिम्मेदारी के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।
अमित शाह ने डोभाल की भूमिका को सराहा
कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लिए गए शुरुआती महत्वपूर्ण फैसलों में अजीत डोभाल को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार नियुक्त करना शामिल था। शाह ने कहा कि इस निर्णय के बाद भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति के दृष्टिकोण में उल्लेखनीय बदलाव आया और देश ने वैश्विक मंच पर अधिक आत्मविश्वास के साथ अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
भागवत भी दे चुके हैं नई पीढ़ी को लेकर संदेश
इससे पहले 25 जुलाई को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने भी नई पीढ़ी के साथ संवाद पर जोर दिया था। उन्होंने कहा था कि आज के युवा सवाल पूछते हैं, इसलिए उन्हें आदेश देने के बजाय तर्क और संवाद के माध्यम से समझाना चाहिए। उनका कहना था कि बातचीत के जरिए ही नई पीढ़ी को सही दिशा दी जा सकती है।
कौन है Gen Z?
Gen Z यानी 1997 से 2012 के बीच जन्मी पीढ़ी, जिसे डिजिटल युग की पहली पीढ़ी माना जाता है। सोशल मीडिया, इंटरनेट और नई तकनीकों के साथ पली-बढ़ी यह पीढ़ी अपनी बात पारंपरिक तरीकों की बजाय डिजिटल और विजुअल माध्यमों से रखने के लिए जानी जाती है।
