पेयजल परिक्षण अधिनियम 1986 तथा संशोधन अधिनियम 2002 की धारा 3 के तहत जारी आदेश में, धारा 4(1) के अंतर्गत जिले के सभी जल स्रोतों—जैसे बांध, नदियां, नहरें, झीलें, कुएं और नलकूप—से पानी के उपयोग पर प्रतिबंध लगाया गया है। यह प्रतिबंध घरेलू उपयोग को छोड़कर सिंचाई, औद्योगिक और व्यावसायिक कार्यों के लिए पानी लेने पर लागू होगा। हालांकि, जिन मामलों में पहले से अनुमति प्राप्त है, उन्हें इस प्रतिबंध से बाहर रखा गया है।
इसके अलावा, धारा 6(1) के तहत निजी और अशासकीय नलकूपों के खनन पर पूर्ण रोक लगा दी गई है। बिना अनुमति जिले में बोरिंग मशीनों के प्रवेश और खनन कार्य भी प्रतिबंधित रहेंगे। आदेश का उल्लंघन करने पर संबंधित बोरिंग मशीन को जब्त कर एफआईआर दर्ज की जाएगी।
नियमों के उल्लंघन पर पहली बार 5 हजार रुपए का जुर्माना लगाया जाएगा, जबकि दोबारा उल्लंघन करने पर 10 हजार रुपए का जुर्माना या अधिकतम दो वर्ष तक की सजा का प्रावधान किया गया है। यह आदेश 1 अप्रैल 2026 से 31 जुलाई 2026 तक प्रभावी रहेगा।