यह घटना उस समय हुई जब पाइपलाइन दबाव को सहन नहीं कर सकी। जानकारी के अनुसार, परियोजना की कुल 9 किलोमीटर लंबी मेनलाइन में से अब तक केवल लगभग 3 किलोमीटर हिस्से तक ही खेतों में पानी पहुंच सका है, जो काम की धीमी गति को दर्शाता है।
भारतीय किसान संघ ‘डेरा डालो, घेरा डालो’ आंदोलन के तहत पिछले तीन दिनों से धरना दे रहा है। इसी दौरान एनवीडीए के कार्यपालन यंत्री एमके सिंह और जीबीपीआर कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर रघु कुर्मिला ने किसानों को आश्वस्त किया कि कार्य जल्द पूरा किया जाएगा।
इसके बावजूद किसान संघ के प्रतिनिधि परियोजना की गुणवत्ता और कार्य की धीमी प्रगति पर सवाल उठा रहे हैं। उन्होंने जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी उठाई है।
किसान प्रतिनिधियों ने चेतावनी दी है कि जब तक परियोजना के सभी पांचों पंप चालू नहीं किए जाते, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। भारतीय किसान संघ के संभागीय प्रतिनिधि श्यामसिंह पवार ने कहा कि यह परियोजना अत्यधिक देरी और लापरवाही के साथ संचालित हो रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि संगठन लगातार अनियमितताओं की शिकायत कर रहा है और दोषियों पर कार्रवाई की मांग कर रहा है, लेकिन शासन और प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है। बताया गया कि परियोजना की समय-सीमा दो बार बढ़ाई जा चुकी है, लेकिन मशीनों की संख्या में वृद्धि नहीं की गई। इसके चलते पिछले दो वर्षों में किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है।