निरीक्षण के दौरान सिंधिया ने गौर किया कि उनके साथ चल रहे लोग थकान महसूस कर रहे हैं। इस पर उन्होंने कहा, “इतनी जल्दी थक जाते हो” और खुद दौड़ने लगे। उनके दौड़ते ही प्रशासनिक अधिकारी, पुलिसकर्मी और अन्य लोग भी उनके पीछे दौड़ पड़े। इस दौरान मध्यप्रदेश सरकार के मंत्री तुलसी सिलावट और ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर भी मौजूद थे, जिन्हें उनके साथ दौड़ना पड़ा। एलिवेटेड रोड पर दौड़ते हुए सिंधिया के वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आए हैं और उन्हें इस रोड पर दौड़ने वाला पहला व्यक्ति बताया जा रहा है।
इसके बाद कलेक्ट्रेट में सिंधिया ने अधिकारियों के साथ बैठक कर करोड़ों रुपए के विकास कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने प्रोजेक्ट्स की प्रगति को लेकर सवाल उठाए और देरी पर नाराजगी जताई। इस बैठक में ग्वालियर के सांसद भारत सिंह कुशवाह शामिल नहीं हुए, जिसके बाद राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गईं और भाजपा के अंदर गुटबाजी के कयास लगाए जाने लगे।
बैठक में शामिल न होने को लेकर सांसद कुशवाह ने कहा कि समीक्षा बैठकें नियमित रूप से होती रहती हैं और जनप्रतिनिधि भी समय-समय पर इनकी समीक्षा करते हैं। उन्होंने कहा कि मुख्य उद्देश्य विकास कार्यों को समय पर पूरा करना होना चाहिए।
सिंधिया ने कहा कि ग्वालियर के विकास के लिए एक विस्तृत रोडमैप तैयार किया गया है, जिसमें चंबल से पानी लाने की योजना, एलिवेटेड रोड और रेलवे स्टेशन के आधुनिकीकरण जैसे प्रोजेक्ट शामिल हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि विकास कार्यों में किसी भी प्रकार की देरी स्वीकार नहीं की जाएगी।
वहीं, कांग्रेस के एक विधायक ने भी इस मामले पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह स्पष्ट नहीं है कि सांसद को बैठक में बुलाया गया था या नहीं, लेकिन शहर के विकास से जुड़ी समीक्षा में सभी जनप्रतिनिधियों की भागीदारी जरूरी है। इस पूरे घटनाक्रम में जहां एक ओर सिंधिया का अलग अंदाज चर्चा में रहा, वहीं दूसरी ओर बैठक से सांसद की अनुपस्थिति ने राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया है।