परिजनों से मुलाकात के बाद पटवारी ने राज्य सरकार और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि यह घटना महज एक दुर्घटना नहीं है, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही का परिणाम है। उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव को सीधे तौर पर घेरते हुए कहा कि “मुख्यमंत्री जी को शर्म आनी चाहिए। उनके कार्यक्रम में भीड़ जुटाने के कारण 10 लोगों की जान चली गई।”
पटवारी ने यह भी आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री का दौरा एक “ईवेंट” की तरह आयोजित किया गया, जिसमें पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदनशीलता का अभाव रहा। उन्होंने कहा कि अब तक मृतकों के परिजनों को अंतिम संस्कार के लिए केवल 5 हजार रुपए दिए गए हैं, जबकि उचित मुआवजा अभी तक नहीं मिला है।
जिला प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाते हुए पटवारी ने कहा कि छिंदवाड़ा कलेक्टर भी इस मामले में जिम्मेदार हैं। उनके अनुसार, प्रशासनिक अमले का दुरुपयोग कर भीड़ एकत्र की गई थी। इस भीड़ में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, नल चालक और स्कूलों में भोजन बनाने वाले कर्मचारी शामिल थे, जो इस हादसे का शिकार बने।
उन्होंने एक 17 वर्षीय बच्ची का उल्लेख करते हुए कहा कि इस दुर्घटना में उसके परिवार के सभी सदस्य की मृत्यु हो गई, जो अत्यंत दुखद है। पटवारी ने मांग की कि सरकार सभी मृतकों के परिजनों को एक-एक करोड़ रुपए का मुआवजा प्रदान करे और इस पूरे मामले में जिम्मेदारी तय की जाए। इसके बाद जीतू पटवारी शाम करीब 4 बजे छिंदवाड़ा से भोपाल के लिए रवाना हो गए।