मार्क जकरबर्ग, मेटा के सीईओ7
नई दिल्ली। Meta के CEO मार्क जुकरबर्ग ने भारत सरकार से प्लेटफॉर्म संचालन में हुई चूक, चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज मैटेरियल (CSAM) और डीपफेक कंटेंट से जुड़े मामलों पर बिना शर्त माफी मांगी है। न्यूज एजेंसी PTI ने सूत्रों के हवाले से बताया कि कंपनी ने सरकार के समक्ष अपनी गलती स्वीकार करते हुए खेद जताया है।
इससे पहले मंगलवार को संसदीय समिति ने Meta को तीन दिन के भीतर बिना शर्त माफी मांगने का निर्देश दिया था। समिति ने चेतावनी दी थी कि यदि कंपनी तय समय में माफी नहीं मांगती, तो उसे आईटी कानून के तहत मिलने वाली कानूनी सुरक्षा (Safe Harbour Protection) और अन्य छूट वापस लेने पर विचार किया जा सकता है।
दिल्ली में IT मंत्रालय और Meta के बीच दो दिन की बैठक
इसी विवाद के बीच केंद्रीय आईटी मंत्रालय और Meta की ग्लोबल टीम के अधिकारियों के बीच दिल्ली में दो दिवसीय बैठक शुरू हुई है। 5 अगस्त को बैठक का पहला दौर हुआ, जिसमें सरकार ने कंपनी से भारतीय कानूनों के अनुपालन और कंटेंट मॉडरेशन सिस्टम पर जवाब मांगा।
आईटी सचिव एस. कृष्णन ने कहा कि बैठक में यह समीक्षा की जाएगी कि Meta भारतीय कानूनों का किस हद तक पालन कर रही है। इसके अलावा VIP अकाउंट्स की सुरक्षा के लिए बनाए गए सेफगार्ड्स क्यों विफल हुए, WhatsApp की यूजरनेम पॉलिसी और Instagram पर CSAM कंटेंट की मौजूदगी जैसे मुद्दों पर भी कंपनी से जवाब मांगा जाएगा।
PM मोदी का वीडियो हटाने से बढ़ा विवाद
विवाद की शुरुआत उस समय हुई जब 23 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा फेसबुक और इंस्टाग्राम पर साझा किया गया वीडियो कुछ समय के लिए प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया। वीडियो में प्रधानमंत्री ने पेपर लीक को गंभीर समस्या बताते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट की जरूरत पर जोर दिया था।
वीडियो हटने के बाद सरकार ने Meta से जवाब मांगा। बाद में कंपनी ने पोस्ट को दोबारा बहाल करते हुए कहा कि यह कार्रवाई तकनीकी गड़बड़ी की वजह से हुई थी। Meta ने इस पर माफी भी मांगी, लेकिन आईटी मंत्रालय ने कंपनी की सफाई को संतोषजनक नहीं माना।
अब संसदीय समिति और केंद्र सरकार दोनों Meta के कंटेंट मॉडरेशन सिस्टम, भारतीय कानूनों के पालन और प्लेटफॉर्म पर आपत्तिजनक सामग्री की निगरानी को लेकर कंपनी की जवाबदेही तय करने की तैयारी में हैं।
