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पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह ने मध्य प्रदेश में कथित बड़े अनाज घोटाले को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) से जांच कराने की मांग की है। मामला सीहोर और रायसेन जिलों में निजी और सरकारी गोदामों में रखे गए करीब 40 हजार टन गेहूं से जुड़ा बताया जा रहा है। आरोप है कि यह गेहूं समय पर गोदामों से नहीं हटाया गया, जिससे वह खराब हो गया और भारी वित्तीय नुकसान हुआ। दिग्विजय सिंह के अनुसार यह अनाज वर्ष 2017 से 2021 के बीच सीहोर जिले के बकतारा क्षेत्र में खरीदा गया था। नियमों के अनुसार इसे 8 से 10 महीने के भीतर गोदामों से हटा लिया जाना चाहिए था, लेकिन इसे लगभग 5 वर्षों तक वहीं रखा गया। आरोप है कि इस अवधि में निजी गोदाम मालिकों को हर महीने किराए के रूप में बड़ी राशि दी जाती रही। समय पर उठाव न होने के कारण गेहूं में घुन लग गया और वह लैब परीक्षण में अनुपयोगी पाया गया। इसके बाद कथित रूप से इस खराब अनाज को रायसेन जिले के सरकारी वेयरहाउसों में स्थानांतरित कर दिया गया, जिससे निजी गोदाम मालिकों पर पेनल्टी से बचाव हो सके और जिम्मेदारी सरकारी व्यवस्था पर डाली जा सके। दावा किया गया है कि इस पूरे मामले से सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ है। लगभग 40 हजार टन गेहूं, जिसकी कीमत करीब 100 करोड़ रुपये बताई जा रही है, पूरी तरह खराब हो गया। वहीं, गोदाम किराया और रखरखाव के नाम पर 150 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जाने का आरोप है। इसके अलावा सड़े हुए अनाज के परिवहन के लिए भी कथित रूप से करोड़ों रुपये का भुगतान किया गया, जिसे आवश्यक नहीं बताया गया है। दिग्विजय सिंह ने पत्र में कहा है कि इस मामले में निजी गोदाम मालिकों, कुछ अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत की जांच जरूरी है। उन्होंने मांग की है कि उच्च स्तरीय EOW जांच कराई जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए सरकारी धन की वसूली की जाए।
