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भगवान महावीर स्वामी के जन्म कल्याणक महोत्सव पर विदिशा में जैन समाज ने एक विशाल चल समारोह निकाला। यह आयोजन शहर भर में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया।
चल समारोह की शुरुआत
चल समारोह की शुरुआत किलेंदर स्थित दिगंबर जैन छोटे मंदिर से हुई। यहां से भगवान महावीर की प्रतिमा को चांदी की पालकी में विराजमान कर नगर भ्रमण कराया गया। श्रद्धालु पारंपरिक वेशभूषा – सफेद कुर्ता-पायजामा, केसरिया दुपट्टा और सफेद टोपी में – पालकी को कंधों पर उठाकर चल रहे थे।
जुलूस और आकर्षण
जुलूस में डीजे, बैंड, बग्गी और सुसज्जित रथ शामिल थे। आचार्य विद्यासागर जी महाराज, आचार्य समय सागर जी महाराज और कुंडलपुर वाले बड़े बाबा के आकर्षक कटआउट भी प्रदर्शित किए गए। जैन मंदिरों की पाठशालाओं के बच्चों, महिला मंडल की महिलाओं सहित बड़ी संख्या में जैन समाज के लोग इस समारोह में शामिल हुए। महिलाएं डांडिया खेलते हुए चल रही थीं।
श्रद्धालु “जियो और जीने दो” के जयकारों के साथ आगे बढ़ रहे थे। युवा वर्ग भजनों पर नाचते-गाते हुए उत्साह बढ़ा रहा था। महिला मंडल की सदस्य हाथों में धर्म ध्वजा लेकर चल रही थीं। रास्ते में जगह-जगह श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा कर जुलूस का स्वागत किया।
धर्मसभा और स्वास्थ्य शिविर
पालकी में विराजमान भगवान महावीर और जिनवाणी जी की आरती उतारी गई। तेज धूप के बावजूद लोगों का उत्साह बना रहा। यह चल समारोह शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए माधवगंज चौराहे पहुंचा। यहां एक धर्मसभा का आयोजन किया गया, जिसमें भगवान महावीर का अभिषेक, शांतिधारा और पूजन विधि-विधान से संपन्न हुआ।
कार्यक्रम के दौरान जैन समाज ने मिठाई वितरण, भंडारा और निशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण शिविर का आयोजन भी किया। इसमें बड़ी संख्या में लोगों ने लाभ उठाया। इस अवसर पर विधायक मुकेश टंडन सहित कई जनप्रतिनिधि और समाज के प्रमुख लोग मौजूद थे।
इस पूरे आयोजन ने धार्मिक आस्था को सुदृढ़ करने के साथ-साथ भगवान महावीर के अहिंसा, करुणा और सहअस्तित्व के संदेश को भी जन-जन तक पहुंचाया।
