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दमोह कलेक्ट्रेट के सामने बुधवार को हजारों शिक्षकों ने टीईटी (TET) परीक्षा के विरोध में धरना दिया और राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा। यह प्रदर्शन मध्यप्रदेश शिक्षक संयुक्त मोर्चा के बुलावे पर हुआ, जिसमें जिले भर के शिक्षक और कर्मचारी संगठन शामिल रहे।
शिक्षकों का कहना है कि वे लगभग 30 साल पहले ही परीक्षा पास करके नियुक्त हुए थे और अब इस उम्र में दोबारा परीक्षा देना उनके लिए संभव नहीं है। शिक्षक आसिफ अंजुम ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों की परीक्षा लेने की बात कही जा रही है। इससे केवल मध्यप्रदेश के लगभग 2 लाख शिक्षक ही नहीं, बल्कि पूरे देश के 52 लाख शिक्षक प्रभावित हैं। इस कारण शिक्षकों ने मांग की है कि टीईटी परीक्षा को तुरंत निरस्त किया जाए।
मौके पर शिक्षक वरिष्ठता और पदोन्नति के मुद्दों पर भी नाराजगी जाहिर कर रहे थे। उनका कहना है कि कई शिक्षकों की नियुक्ति 1998 में हुई थी, लेकिन सरकार उन्हें 2018 से कर्मचारी मान रही है। इस वजह से उनके प्रमोशन और अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। शिक्षकों ने राज्य सरकार से अपील की है कि वे अन्य राज्यों की तरह सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू याचिका दायर करें और टीईटी परीक्षा को रद्द करवाएं। प्रदर्शन के बाद शिक्षक भारी संख्या में रैली निकालकर कलेक्ट्रेट पहुंचे और अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा।
