इंदौर में वैकल्पिक चिकित्सकों ने शासन की उदासीनता पर सवाल खड़े करते हुए इलेक्ट्रो होम्योपैथी को मान्यता देने की मांग फिर तेज कर दी है। वैकल्पिक चिकित्सक संघ के जिला अध्यक्ष डॉ आर एन मिश्रा ने बताया कि भाजपा चिकित्सा प्रकोष्ठ के नव नियुक्त प्रदेश संयोजक डॉ विशाल सिंह बघेल के इंदौर आगमन पर उन्हें ज्ञापन सौंपकर स्पष्ट किया गया कि जब केंद्र सरकार हर्बल पद्धतियों को बढ़ावा दे रही है, तो इलेक्ट्रो होम्योपैथी को अब तक मान्यता से वंचित रखना समझ से परे है।
प्रतिनिधि मंडल ने शासन को कठघरे में खड़ा करते हुए कहा कि एक ओर मध्य प्रदेश में वर्षों पुराने आदेशों के तहत इलेक्ट्रो होम्योपैथ चिकित्सकों को बिना पंजीयन प्रैक्टिस की अनुमति है, वहीं दूसरी ओर जमीनी स्तर पर प्रशासनिक अधिकारी इन्हीं चिकित्सकों को परेशान कर रहे हैं। यह दोहरा रवैया न सिर्फ भ्रम पैदा कर रहा है, बल्कि सैकड़ों चिकित्सकों के अधिकारों का उल्लंघन भी है। उच्च न्यायालय के निर्देशों के बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है।
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि राजस्थान जैसे राज्य इस पद्धति को मान्यता दे चुके हैं, जबकि मध्य प्रदेश में 100 वर्षों से अधिक पुरानी, पौधों आधारित और बिना साइड इफेक्ट वाली इस चिकित्सा पद्धति को अब तक औपचारिक स्वीकृति नहीं मिल पाई है। चिकित्सकों ने सवाल उठाया कि आखिर कब तक वैकल्पिक चिकित्सा को नजरअंदाज किया जाएगा।
डॉ विशाल सिंह बघेल ने इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए कहा कि यह न्यायोचित मांग है और वे इसे मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव तथा स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला के समक्ष प्रमुखता से उठाएंगे। उन्होंने भरोसा दिलाया कि प्रदेश में किसी भी वैकल्पिक चिकित्सक के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा और प्रशासनिक स्तर पर मनमानी रोकने के लिए कड़े कदम उठाए जाएंगे। साथ ही उन्होंने चिकित्सकों से अपील की कि यदि कहीं भी अनावश्यक दबाव या कार्रवाई हो तो तत्काल जानकारी दें, ताकि शासन को जवाबदेह बनाया जा सके।
