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मध्य प्रदेश कैडर के रिटायर्ड आईएएस अधिकारी और नॉवेलिस्ट Niyaz Khan ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर किए गए अपने ट्वीट्स में विश्व की जनसंख्या, नस्लीय संतुलन और भारत की स्थिति को लेकर कई बयान दिए हैं।
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मध्य प्रदेश कैडर के रिटायर्ड आईएएस अधिकारी और नॉवेलिस्ट Niyaz Khan ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर किए गए अपने ट्वीट्स में विश्व की जनसंख्या, नस्लीय संतुलन और भारत की स्थिति को लेकर कई बयान दिए हैं।
उन्होंने अपने एक ट्वीट में कहा कि दुनिया की कुल 8 अरब आबादी में लगभग 1.5 अरब श्वेत और 6.5 अरब अश्वेत या गैर-श्वेत लोग शामिल हैं, और यह बड़ी आबादी पृथ्वी पर दबाव बढ़ा रही है। उन्होंने लिखा कि इस स्थिति का समाधान इनकी संख्या को आधा करना ही हो सकता है। उनके अनुसार, गैर-श्वेत लोग अधिक बच्चे पैदा कर रहे हैं, जबकि श्वेत लोग सीमित संख्या में बच्चे पैदा करते हैं।
भारत की जनसंख्या को लेकर भी उन्होंने टिप्पणी करते हुए कहा कि देश की विशाल आबादी अब अभिशाप बन गई है। उन्होंने लिखा कि निम्न, मध्यम वर्ग और गरीब तबके के लोग बेहद दयनीय परिस्थितियों में जीवन जी रहे हैं और वे “शक्तिहीन झुंड” बनकर रह गए हैं। उन्होंने एक बच्चे के नियम को समय की आवश्यकता बताते हुए इस पर जल्द विचार करने की बात कही।
इसके अलावा, उन्होंने समाज में नफरत फैलाने वालों को लेकर भी अपनी राय व्यक्त की। उन्होंने कहा कि किसी भी समुदाय में नफरत फैलाने वालों को आजीवन कारावास में रखा जाना चाहिए। उनके अनुसार, यदि ऐसे लोगों को स्वतंत्र छोड़ दिया जाए तो वे समाज में जहर फैलाते हैं, जो राष्ट्र के लिए हानिकारक होता है। उन्होंने यह भी कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि नफरत फैलाने वालों को उनकी क्षमता के अनुसार बड़े सरकारी पद भी मिल जाते हैं।
3 अप्रैल को किए गए अन्य ट्वीट्स में उन्होंने यह भी लिखा कि भारत में सबसे अधिक नफरत हिंदी भाषी क्षेत्रों में पाई जाती है, जबकि दक्षिण भारत और उत्तर-पूर्वी क्षेत्र अपेक्षाकृत इससे मुक्त हैं। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि क्या भाषा नफरत के लिए जिम्मेदार हो सकती है।
एक अन्य ट्वीट में उन्होंने पृथ्वी और पर्यावरण को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इस आकाशगंगा में मनुष्यों के लिए केवल एक ही ग्रह है, लेकिन इसकी देखभाल और रक्षा करने के बजाय लोग इसे नष्ट करने में लगे हैं। उन्होंने लिखा कि लगातार युद्ध पृथ्वी को नुकसान पहुंचा रहे हैं और मानवजनित जलवायु परिवर्तन मानव जाति के अस्तित्व के लिए खतरा बनता जा रहा है। उनके अनुसार, यह दुखद है कि पृथ्वी की चिंता करने वाला कोई नहीं दिखता।