ग्वालियर में कथित एमडीएमए ड्रग्स तस्करी के मामले में मोहित तिवारी, जो करीब सात महीने जेल में रहे, सहित एक अन्य आरोपी को हाई कोर्ट ने आरोपमुक्त कर दिया है। यह फैसला तब आया जब फोरेंसिक जांच में पुलिस द्वारा जब्त किए गए पदार्थ को एमडीएमए ड्रग्स नहीं बल्कि यूरिया पाया गया।
यह मामला 6 सितंबर 2022 का है, जब मुरार पुलिस ने लाल टिपारा क्षेत्र के पास कार्रवाई करते हुए मोहित तिवारी समेत कुल आठ लोगों को गिरफ्तार किया था। उस समय पुलिस ने दावा किया था कि यह ग्वालियर में एमडीएमए ड्रग्स तस्करी का पहला बड़ा मामला है और आरोपियों को ड्रग्स तस्कर बताया गया था। हालांकि, जब्त किए गए पदार्थ की फोरेंसिक जांच के बाद मामले ने नया मोड़ लिया।
जांच दो अलग-अलग लैब में कराई गई और दोनों रिपोर्टों में यह स्पष्ट हुआ कि पदार्थ एमडीएमए नहीं बल्कि यूरिया है। यूरिया किसी भी प्रकार से मादक पदार्थ की श्रेणी में नहीं आता। आरोपियों के अधिवक्ताओं ने अदालत में दलील दी कि जब्त सामग्री ड्रग्स नहीं है, इसलिए एनडीपीएस एक्ट के तहत लगाए गए आरोप पूरी तरह गलत हैं।
इस आधार पर आरोपियों ने हाई कोर्ट में क्रिमिनल रिवीजन याचिका दायर की, जिसमें 10 मई 2024 को एनडीपीएस कोर्ट द्वारा तय किए गए आरोपों को चुनौती दी गई थी। सभी पक्षों की दलीलों और फोरेंसिक रिपोर्टों पर विचार करने के बाद हाई कोर्ट ने मोहित तिवारी और एक अन्य आरोपी को आरोपमुक्त कर दिया। शेष आरोपियों को हाई कोर्ट से जमानत पर रिहा किया गया।
हालांकि, इसी मामले में एक आरोपी हृदयेश के पास से कट्टा बरामद हुआ, जिसके चलते उसके खिलाफ अलग से मामला दर्ज किया गया है। यह मामला वर्तमान में मजिस्ट्रेट कोर्ट में विचाराधीन है। वहीं, शेष आरोपियों के खिलाफ ड्रग्स तस्करी से संबंधित मामला फिलहाल जारी रहेगा।
