आयोजन समिति के अनुसार, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है। इसे ध्यान में रखते हुए व्यापक स्तर पर तैयारियां की जा रही हैं। समिति संयोजक डॉ. विनय सिंह चौहान ने बताया कि बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए ठहरने और भोजन की समुचित व्यवस्था की गई है।
गर्मी के मौसम को ध्यान में रखते हुए बैठक व्यवस्था, टेंट, पेयजल और अन्य आवश्यक सुविधाओं के विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं। कार्यक्रम स्थल पर विशाल पंडाल, पार्किंग और सुरक्षा व्यवस्था भी सुनिश्चित की जा रही है, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
भक्ति सत्संग का शुभारंभ 9 अप्रैल को शाम 4 बजे किया जाएगा। इसके बाद 10 से 12 अप्रैल तक प्रतिदिन सुबह 9 बजे से 11:30 बजे तक और शाम 4:30 बजे से 7 बजे तक प्रवचन होंगे। 12 अप्रैल को दोपहर 12 बजे मंत्र दीक्षा का विशेष कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।
इस आयोजन की एक विशेष पहल के तहत 10 अप्रैल (शुक्रवार) को स्कूली और कॉलेज विद्यार्थियों के लिए अलग से सत्र आयोजित किया जाएगा। इस सत्र में युवाओं को संस्कार, जीवन मूल्यों और नैतिक शिक्षा पर मार्गदर्शन दिया जाएगा।
आयोजन समिति ने इस सत्संग के माध्यम से 10 गुरुकुल और 108 संस्कार केंद्र स्थापित करने का लक्ष्य रखा है। हजारों श्रद्धालुओं की संभावित उपस्थिति से पूरे क्षेत्र में धार्मिक और आध्यात्मिक माहौल बनने की उम्मीद जताई जा रही है।
परमपूज्य सुधांशु जी महाराज देश के प्रख्यात आध्यात्मिक वक्ता और समाज सुधारक के रूप में जाने जाते हैं। वे विश्व जागृति मिशन के संस्थापक हैं। उनके प्रवचनों में आध्यात्मिकता के साथ-साथ व्यावहारिक जीवन, पारिवारिक मूल्यों और नैतिकता पर विशेष जोर दिया जाता है। उन्होंने देश-विदेश में अनेक सत्संग और आध्यात्मिक कार्यक्रमों के माध्यम से लाखों लोगों को प्रेरित किया है। उनके संदेशों में सकारात्मक सोच, आत्मविकास, राष्ट्रभक्ति और भारतीय संस्कृति के संरक्षण का भाव प्रमुख रूप से देखने को मिलता है।