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बालाघाट में चैत्र नवरात्र की अष्टमी पर गुरुवार, 26 मार्च को देवी मंदिरों में भारी श्रद्धालुओं की भीड़ देखने को मिली। इस अवसर पर मां महागौरी का विशेष पूजन किया गया और उन्हें अष्टमी का भोग अर्पित किया गया। यह पूजा नौ दिन तक मां के नौ रूपों की आराधना के बाद आयोजित की गई।
नगर के काली मंदिर में पहुंची महिलाओं ने मां को अष्टमी का भोग चढ़ाया और अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए आशीर्वाद लिया। धार्मिक मान्यता के अनुसार अष्टमी तिथि पर सच्चे मन से मां महागौरी की पूजा करने से सभी इच्छाएं पूरी होती हैं।
काली मंदिर में भोग अर्पित करने आई महिलाओं ने बताया कि अष्टमी तिथि का नवरात्र में विशेष महत्व है। इस दिन मातारानी को हलवा, पूड़ी, बताशा और पान चढ़ाकर भोग लगाया जाता है और भक्त उनसे अपनी सभी मनोकामनाओं की पूर्ति का आशीर्वाद मांगते हैं।
इस वर्ष चैत्र नवरात्र आठ दिनों का था क्योंकि अष्टमी और नवमी एक ही दिन पड़ी। इस कारण 26 मार्च को अष्टमी मनाई गई। घरों और मंदिरों में कन्याओं के लिए भोज का आयोजन भी किया गया।
नगर के कालीपाठ मंदिर, त्रिपुर सुंदरी मंदिर सहित अन्य देवी मंदिरों में अष्टमी तिथि पर हवन-पूजन संपन्न हुआ। मुख्यालय और पूरे जिले के देवी मंदिरों में देवी मां को भोग अर्पित किया गया। हवन-पूजन के बाद नवकन्याओं का पूजन कर उन्हें भोजन कराया गया।
घरों में स्थापित मनोकामना ज्योति कलश और ज्वारे का नौ दिन तक विधिपूर्वक पूजा-अर्चना की गई। इन ज्योति कलशों का विसर्जन रामनवमी के दिन विधि-विधान के अनुसार किया जाएगा।
