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उज्जैन के अलखधाम नगर में रहने वाले शैलेन्द्र तल्लेरा और उनकी पत्नी प्रमिला तल्लेरा ने जैन धर्म के वर्षीतप को एक वर्ष तक पूर्ण किया है। इस तप के दौरान दोनों ने अपने स्वास्थ्य में सुधार होने का दावा किया है, जिसमें ब्लड प्रेशर, वजन और कोलेस्ट्रॉल स्तर में नियंत्रण की बात कही गई है।
शैलेन्द्र तल्लेरा के अनुसार, वर्षीतप शुरू करने से पहले उनका ब्लड प्रेशर लगभग 190 रहता था और उन्हें नियमित रूप से दवा लेनी पड़ती थी। लेकिन तप के बाद उनका बीपी 140 से 150 के बीच स्थिर रहने लगा है और अब दवा की आवश्यकता नहीं पड़ रही है। इसी दौरान उनका वजन 95 किलो से घटकर 73 किलो हो गया है। उन्होंने यह भी बताया कि एसिडिटी की समस्या भी पूरी तरह समाप्त हो गई है और कोलेस्ट्रॉल का स्तर भी सामान्य हो गया है।
इस दंपती ने 12 अप्रैल 2025 से वर्षीतप की शुरुआत की थी। इस तप में 36 घंटे के अंतराल में केवल दो बार भोजन किया जाता है और उसके बाद तीन दिन तक उपवास रखा जाता है। यह क्रम लगभग 13 महीने यानी करीब 400 दिनों तक लगातार चलता है।
वर्षीतप के दौरान भोजन केवल सूर्योदय के बाद और सूर्यास्त से पहले ही लिया जाता है, बाकी समय केवल जल ग्रहण किया जाता है। इस कठोर तप का समापन 20 अप्रैल को पालीताना में पारणा के साथ किया जाएगा। जैन धर्म में वर्षीतप को अत्यंत कठिन तप माना जाता है, जिसमें एक दिन उपवास और अगले दिन सीमित आहार का क्रम चलता है। पूरे तप में लगभग 200 उपवास शामिल होते हैं।
