Chaitra Purnima Festival Celebrated at Bawan Jinalaya in Jhabua; Community Observes Moksha Day of Pundarik Swami|झाबुआ के बावन जिनालय में चैत्री पूर्णिमा महोत्सव: पुण्डरीक स्वामी के मोक्ष दिवस पर श्रद्धालुओं ने किया आयोजन
झाबुआ स्थित श्री ऋषभदेव बावन जिनालय में गुरुवार को चैत्री पूर्णिमा का पर्व पूरे श्रद्धा भाव और उत्साह के साथ मनाया गया। समाजजनों के अनुसार, इसी तिथि पर प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ के प्रथम गणधर श्री पुण्डरीक स्वामी ने पांच करोड़ मुनियों के साथ श्री शत्रुंजय महातीर्थ (पालिताणा) से मोक्ष प्राप्त किया था।
इस पावन अवसर पर साध्वी श्री योगनिधी श्री जी म.सा. आदि ठाणा-3 की निश्रा में विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। दिन की शुरुआत ब्रह्म मुहूर्त में जिनालय में भगवान आदिनाथ के शक्रस्तव अभिषेक से हुई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने भाग लिया। इसके साथ ही केसर पूजन और स्नात्र पूजन की विधियां भी संपन्न हुईं।
सुबह 8:30 बजे भगवान की आरती की गई, जिसमें श्रीसंघ के सदस्यों ने सामूहिक रूप से भक्ति गीतों के साथ आराधना की। इसके बाद सुबह 9:15 बजे श्री सिद्धाचल महातीर्थ की ‘भाव यात्रा’ का आयोजन किया गया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने विधिपूर्वक शत्रुंजय तीर्थ की वंदना कर आध्यात्मिक अनुभूति प्राप्त की। दोपहर 1 बजे से श्री सिद्धाचलजी की ‘नव्वाणु’ (99) प्रकार की विशेष पूजा आयोजित की गई, जिसमें श्रद्धालुओं ने सहभागिता निभाई।
धर्मसभा को संबोधित करते हुए साध्वी योगनिधी श्री जी म.सा. ने पुण्डरीक स्वामी के जीवन, उनके त्याग और देव वंदन की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि आत्मकल्याण के मार्ग पर चलकर ही मोक्ष की प्राप्ति संभव है।कार्यक्रम के दौरान नौ दिवसीय ‘नवपद ओलीजी’ की आराधना करने वाले लाभार्थियों का श्रीसंघ द्वारा सम्मान किया गया। वहीं, संघवी परिवार द्वारा दी गई सेवाओं की भी सराहना की गई। दोपहर 11 बजे प्रभावना (भाता वितरण) का आयोजन किया गया, जिसका लाभ मेहता परिवार ने लिया। पूरे दिन जिनालय परिसर में मंत्रोच्चार और भक्ति गीतों की गूंज बनी रही, जिससे वातावरण पूरी तरह आध्यात्मिक बना रहा।