बड़वानी के दशहरा मैदान स्थित शासकीय एकीकृत माध्यमिक विद्यालय क्रमांक 9 में शनिवार को स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित तीन दिवसीय पुस्तक मेले का शुभारंभ किया गया। हालांकि, मेले के पहले ही दिन व्यवस्थाओं में कमी साफ तौर पर नजर आई। दोपहर करीब 1:30 बजे तक मेले में केवल दो ही स्टॉल लगाए गए थे, जिससे वहां पहुंचे अभिभावकों को निराशा का सामना करना पड़ा।
अभिभावकों को उम्मीद थी कि इस मेले में उन्हें एक ही स्थान पर कम कीमत में किताबें और कॉपियां मिल जाएंगी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। मौके पर मौजूद दो स्टॉलों में से एक पर केवल कॉपियां ही उपलब्ध थीं, जबकि दूसरे स्टॉल का संचालन सेंधवा निवासी धर्मेंद्र पाटिल (गुप्ता बुक स्टोर, सेंधवा) द्वारा किया जा रहा था। उनके स्टॉल पर केवल एमपी बोर्ड और एनसीईआरटी की किताबें ही मौजूद थीं, जबकि स्थानीय प्रकाशनों की किताबें उपलब्ध नहीं थीं।
मेले में पहुंचे शिकायतकर्ता नीलेश सोलंकी ने बताया कि वहां आवश्यक किताबें नहीं मिल रही हैं, जिसके कारण अभिभावकों को बिना खरीदारी किए वापस लौटना पड़ रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि जिला स्तर पर आयोजित इस पुस्तक मेले में केवल दो दुकानों का होना चिंता का विषय है।
अभिभावकों का आरोप है कि दुकानदार उन्हें तुरंत किताबें देने के बजाय तीन-चार दिन या एक सप्ताह बाद आने के लिए कह रहे हैं, जबकि यह मेला 31 मार्च तक ही आयोजित होना है। उनका कहना है कि दुकानदार जानबूझकर ऐसी तारीखें बता रहे हैं, ताकि अभिभावक बाद में उनकी दुकानों से खरीदारी करने के लिए मजबूर हों।
अभिभावकों ने सुझाव दिया कि जिला प्रशासन को मेले के आयोजन से पहले विक्रेताओं के साथ बैठक आयोजित करनी चाहिए थी। इस बैठक में यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए था कि सभी विक्रेता अपने स्टॉल पर पर्याप्त मात्रा में किताबें और कॉपियां उपलब्ध रखें, ताकि अभिभावकों को एक ही स्थान पर सभी आवश्यक सामग्री मिल सके।
इस दौरान अरुण यादव ने बताया कि बड़वानी मुख्यालय के कई विक्रेता मेले में शामिल नहीं हुए, जिससे उनकी रुचि की कमी स्पष्ट दिखाई देती है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ दुकानदार अभिभावकों को टालने का प्रयास कर रहे हैं। मेले की व्यवस्थाओं को लेकर जब प्रभारी डीपीसी अशरफ खान से बातचीत करने की कोशिश की गई, तो वे मीडिया के कैमरे देखकर वहां से चले गए।
वहीं, मेले में काउंटर लगाने वाले कुछ स्टेशनरी संचालक भी व्यवस्थाओं से संतुष्ट नहीं दिखे। उनका कहना था कि बड़े स्टेशनरी व्यवसायियों द्वारा न तो स्टॉल लगाए गए हैं और न ही पर्याप्त किताबें लाई गई हैं। जो विक्रेता आए हैं, वे भी चाहते हैं कि अभिभावक किताबों के साथ उनकी ही कॉपियां खरीदें। इस प्रकार, पुस्तक मेले के पहले दिन ही अव्यवस्थाओं के कारण अभिभावकों और संबंधित लोगों में असंतोष का माहौल देखने को मिला।
