निर्मोही अखाड़ा के महंत और पीठाधीश्वर महंत भगवानदास ने बताया कि यह प्रतिमा उनके वर्षों पुराने संकल्प का परिणाम है। उन्होंने कहा कि अयोध्या में भगवान राम के सिंहासन पर विराजमान होने और 500 वर्षों के विवाद के समाप्त होने के बाद वे बुंदेलखंड की धरती पर हनुमान जी की एक भव्य और विश्व स्तरीय प्रतिमा स्थापित करने का संकल्प रखते थे, जो अब पूरा हो चुका है।
महंत भगवानदास के अनुसार, जानराय टोरिया में भगवान राम “आजानभुज सरकार” के रूप में अकेले विराजमान हैं। उनका कहना है कि खर-दूषण वध के बाद के प्रसंग को दर्शाते हुए यह स्वरूप विश्व में कहीं और नहीं मिलता, जहां भगवान राम अकेले स्थापित हों। इसी कारण उनके परम सेवक हनुमान जी की भी अद्वितीय और विशाल प्रतिमा यहां स्थापित की गई है।
इस दावे का समर्थन बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री, चित्रकूट धाम के कामदगिरि पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी रामस्वरूपाचार्य कामतानाथ प्रमुख सहित अन्य संतों ने भी किया। सभी ने इस प्रतिमा को “विश्व में एकमात्र” बताते हुए इसे बुंदेलखंड के लिए गौरव की बात बताया।
इस भव्य प्रतिमा की स्थापना से छतरपुर और पूरे बुंदेलखंड क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने की संभावना जताई जा रही है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां दर्शन करने पहुंचे हैं, जिससे यह स्थल तेजी से एक प्रमुख धार्मिक केंद्र के रूप में उभर रहा है।