इस प्रदर्शन का नेतृत्व जिला पंचायत सदस्य और जयस के जिलाध्यक्ष संदीप धुर्वे ने किया। संगठन ने प्रशासन पर एकतरफा कार्रवाई करने का आरोप लगाया है। जयस ने मांग की है कि 15 दिनों के भीतर इस मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, अन्यथा तय समयसीमा के बाद मुल्ताई बंद किया जाएगा।
ज्ञापन में बताया गया कि 24 मार्च 2026 को कुछ प्रभावशाली लोगों ने आदिवासी परिवारों की जमीन पर कब्जा करने की कोशिश की। इस दौरान महिलाओं और बुजुर्गों के साथ अभद्र व्यवहार और मारपीट की घटनाएं सामने आईं। महिलाओं के साथ झूमा-झटकी के आरोप भी लगाए गए हैं।
संगठन का कहना है कि पीड़ितों को सुरक्षा देने के बजाय उनके खिलाफ ही कथित तौर पर फर्जी एफआईआर दर्ज कर दी गई है। इससे आदिवासी समुदाय में असंतोष और असुरक्षा की भावना बढ़ गई है।
जयस ने जमीन के पुराने रिकॉर्ड में गड़बड़ी का मुद्दा भी उठाया। संगठन के अनुसार, वर्ष 1919 में आदिवासी परिवारों के पास 37.70 एकड़ जमीन दर्ज थी, जो 1972-73 के रिकॉर्ड में घटकर लगभग 19.70 एकड़ रह गई। जयस का कहना है कि यह केवल एक गांव का मामला नहीं है, बल्कि जिले के करीब 1400 गांवों से जुड़ा व्यापक मुद्दा है।
संगठन ने इस पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय स्वतंत्र जांच कराने, आदिवासियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर को निरस्त करने, दोषियों के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट के तहत कार्रवाई करने, पीड़ितों को सुरक्षा और मुआवजा देने तथा पुराने जमीन रिकॉर्ड की जांच कराने की मांग रखी है।
जयस ने स्पष्ट रूप से चेतावनी दी है कि यदि समय रहते उचित कार्रवाई नहीं की गई, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।