Dalit Family Protests in Neemuch Hospital, Accuses Police of Collusion with Accused|नीमच अस्पताल में दलित परिवार का प्रदर्शन, पुलिस पर आरोपियों से मिलीभगत का आरोप



नीमच जिला अस्पताल में एक दलित परिवार न्याय की मांग को लेकर शासन और प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन कर रहा है। ग्राम डासिया निवासी इस परिवार ने मुख्यमंत्री मोहन यादव से या तो न्याय दिलाने या फिर सामूहिक आत्महत्या की अनुमति देने की मांग की है। परिवार का कहना है कि गांव के दबंगों के डर और पुलिस की कथित मिलीभगत के चलते उनके सामने अब कोई विकल्प नहीं बचा है।

इस पूरे मामले की शुरुआत 26 फरवरी 2026 को हुई, जब खेत से चने की फसल ले जाने को लेकर विवाद हुआ। पीड़ित प्रेमचंद मोंगिया के अनुसार, गांव के मोहनसिंह और बाबूसिंह ने उनकी बेटी के साथ मारपीट की और जातिसूचक गालियां दीं। परिवार का आरोप है कि जब वे शिकायत लेकर अजाक थाने पहुंचे, तो पुलिस ने एफआईआर दर्ज करने में देरी की। इसके बाद परिवार ने 181 सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई।

परिवार का कहना है कि इस शिकायत के बाद आरोपी और अधिक आक्रामक हो गए और 15 मार्च को उन्होंने जानलेवा हमला कर दिया। इस हमले में प्रेमचंद, उनकी पत्नी और उनकी बेटी गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया।

अस्पताल में भर्ती घायल परिजनों ने तख्तियां लेकर प्रदर्शन किया, जिनमें पुलिस प्रशासन के खिलाफ नाराजगी साफ दिखाई दी। परिवार ने आरोप लगाया कि पुलिस आरोपियों को संरक्षण दे रही है। उनका कहना है कि घटना की गंभीरता के बावजूद पुलिस ने शुरुआत में मामला सामान्य धाराओं में दर्ज किया और एससी/एसटी एक्ट की धाराओं को शामिल नहीं किया।

प्रदर्शन के दौरान तख्तियों पर लिखे संदेशों में कहा गया कि जातिवादी गुंडों को अजाक और नीमच सिटी पुलिस का संरक्षण मिलने के कारण उन्हें अपनी जमीन और खेत छोड़कर गांव से पलायन करना पड़ सकता है। अन्य तख्तियों पर ‘दलितों पर अत्याचार बंद करो’, ‘पुलिस संरक्षण में गुंडागर्दी बंद करो’ और ‘हमें गांव छोड़ने पर मजबूर मत करो’ जैसे संदेश लिखे थे। एक तख्ती पर मुख्यमंत्री मोहन यादव से न्याय या सामूहिक आत्महत्या की अनुमति देने की मांग भी दर्ज की गई।

इस मामले में पुलिस अधिकारियों ने लगाए गए आरोपों से इनकार किया है। अजाक थाना प्रभारी शब्बी मेव ने कहा कि आरोपियों को किसी भी प्रकार का संरक्षण नहीं दिया जा रहा है। उनके अनुसार, शुरुआती शिकायत के समय मारपीट की घटना सामने नहीं आई थी, इसलिए समझाइश दी गई थी।

वहीं, नीमच सिटी थाना प्रभारी पुष्पा चौहान ने बताया कि मारपीट की घटना के बाद एफआईआर दर्ज कर ली गई थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रारंभ में जाति प्रमाण पत्र उपलब्ध नहीं होने के कारण एससी/एसटी एक्ट की धाराएं नहीं जोड़ी जा सकीं, लेकिन बाद में प्रमाण पत्र मिलने पर संबंधित धाराएं जोड़ दी गई हैं।

 
 

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