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विदिशा में छह दिवसीय पंचकल्याणक महामहोत्सव का भव्य धार्मिक कार्यक्रमों के साथ शुभारंभ हो गया। महोत्सव के पहले दिन घटयात्रा और श्रीजी की भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें जैन समाज के हजारों श्रद्धालु शामिल हुए। शोभायात्रा माधवगंज स्थित श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर से प्रारंभ हुई।
इस आयोजन का पंचकल्याणक महामहोत्सव और देश शांति विधान श्रमण मुनि श्री संभवसागर महाराज, मुनि श्री निस्सीमसागर महाराज और मुनि श्री संस्कारसागर महाराज के ससंघ सानिध्य में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का संचालन प्रतिष्ठाचार्य बाल ब्रह्मचारी विनय भैया सम्राट और तरुण भैया (इंदौर) के निर्देशन में किया गया।
शोभायात्रा में हाथी, घोड़े और झांकियां प्रमुख आकर्षण रही। हाथी पर सोधर्म इंद्र के रूप में सक्षम जैन अपने परिवार के साथ धर्मध्वजा लेकर सवार थे, जबकि घोड़े पर ध्वजवाहक आगे चल रहे थे। इसके पीछे अष्ट कुमारियां, बैंड दल और आचार्य विद्यासागर महाराज व आचार्य समयसागर महाराज के बड़े कटआउट आकर्षण का केंद्र बने रहे।
शोभायात्रा में बड़ी संख्या में महिलाएं एक जैसी साड़ी पहनकर सिर पर कलश रखकर कतार में चल रही थीं। विद्यासागर दिव्य घोष दल में शामिल महिलाएं और बच्चे भी उत्साहपूर्वक दिव्य घोष बजाते हुए आगे बढ़ रहे थे। पांच चांदी की अलग-अलग पालकियों और 14 सुसज्जित बग्गियों में पंचकल्याणक के पात्र बने श्रद्धालु विराजमान थे। पूरे मार्ग को रंगोली से सजाया गया और रास्ते में कई स्थानों पर जैन समाज के लोगों ने श्रीजी की आरती उतारी।
पंचकल्याणक महोत्सव के लिए जैन महाविद्यालय परिसर में भव्य अयोध्या नगरी का निर्माण किया गया है। करीब 25 हजार वर्गफीट क्षेत्र में बने विशेष डोम पंडाल में लगभग पांच हजार श्रद्धालुओं के बैठने की व्यवस्था की गई है। श्रद्धालुओं के लिए तीन बड़ी भोजनशालाएं बनाई गई हैं, जहाँ शुद्ध सात्विक भोजन की सुविधा है। बाहर से आने वाले मेहमानों के लिए ठहरने की भी व्यवस्था की गई है।












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