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खंडवा जिले में खेतों में नरवाई जलाने की घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन ने सख्ती शुरू कर दी है। पंधाना तहसील के ग्राम पाबई खुर्द में गेहूं की नरवाई जलाने के मामले में एक किसान पर 15 हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया है। इसके साथ ही कृषि विभाग ने किसानों से नरवाई नहीं जलाने की अपील करते हुए इसके नुकसान और विकल्पों के बारे में जानकारी दी है।
जिले में लगातार सामने आ रहे नरवाई जलाने के मामलों को देखते हुए प्रशासन ने इस तरह की गतिविधियों पर कार्रवाई तेज कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि खेतों में नरवाई जलाने से पर्यावरण के साथ-साथ मिट्टी की गुणवत्ता को भी नुकसान पहुंचता है।
कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों के अनुसार, नरवाई जलाने से मिट्टी की उर्वरता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। खेत की ऊपरी परत में पौधों के लिए जरूरी पोषक तत्व मौजूद रहते हैं, लेकिन आग लगने से यह परत प्रभावित हो जाती है।
उपसंचालक कृषि नितेश यादव ने बताया कि मिट्टी की ऊपरी सतह में कई प्रकार के उपयोगी सूक्ष्म जीव और पोषक तत्व होते हैं, जो फसलों के विकास के लिए आवश्यक होते हैं। जब खेतों में नरवाई जलाई जाती है तो ये सूक्ष्म जीव नष्ट हो जाते हैं, जिससे जमीन की गुणवत्ता पर असर पड़ता है।
उन्होंने यह भी बताया कि नरवाई जलाने से मिट्टी की संरचना प्रभावित होती है। इससे जमीन कठोर हो जाती है और पानी को सोखने की उसकी क्षमता कम हो जाती है। ऐसे में खेत में बोई गई फसलें जल्दी सूखने लगती हैं। इसके अलावा वातावरण का तापमान भी बढ़ता है और मिट्टी में मौजूद कार्बन तथा नाइट्रोजन का संतुलन बिगड़ जाता है, जिससे फसलों की वृद्धि पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
नरवाई जलाने से मिट्टी में रहने वाले केंचुओं की संख्या भी कम हो जाती है। केंचुए मिट्टी को उपजाऊ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इनके कम होने से मिट्टी में वायु संचार प्रभावित होता है और जैव विविधता पर भी प्रतिकूल असर पड़ता है।
पंधाना तहसील के ग्राम पाबई खुर्द में किसान हेमराज पिता मेहताप सिंह, निवासी इंदौर के खेत में गेहूं की नरवाई जलाने का मामला सामने आया। किसान ने लगभग 10 एकड़ जमीन में गेहूं की फसल बोई थी और कटाई के बाद खेत में बची नरवाई को आग लगा दी गई।
खेत में आग लगते देख आसपास के ग्रामीणों ने इसकी जानकारी पटवारी को दी। इसके बाद शनिवार को पटवारी आकृति मेहता, रोजगार सहायक, कोटवार और ग्रामीणों के साथ मौके पर पहुंचीं। टीम ने मौके का निरीक्षण कर पूरे मामले का पंचनामा तैयार किया। जांच के दौरान यह पुष्टि हुई कि खेत में गेहूं की नरवाई को आग लगाई गई थी।
मामले को गंभीर मानते हुए पंधाना तहसीलदार दिवाकर सुल्या ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के निर्देशों के अनुसार कार्रवाई की। किसान को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया और पर्यावरण क्षतिपूर्ति के रूप में 15 हजार रुपए का चालान किया गया।
कृषि विभाग ने किसानों को नरवाई नहीं जलाने की सलाह देते हुए इसके वैकल्पिक उपाय भी बताए हैं। विभाग के अनुसार कंबाइन हार्वेस्टर, भूसा बनाने की मशीन, रोटावेटर, हैप्पी सीडर, सुपर सीडर और जीरो टिलेज जैसी मशीनों का उपयोग कर खेत में बची नरवाई को हटाया जा सकता है।












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