राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग ने रायसेन के किले में अवैध हथियार बनाने, गोला-बारूद चलाने, डर फैलाने, नागरिकों की सुरक्षा को खतरे में डालने और पुरातात्विक धरोहर को नुकसान पहुँचाने के मामलों में नोटिस जारी करने का निर्णय लिया है। आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने स्पष्ट किया कि महादेव मंदिर में हिंदुओं को दर्शन से रोकने वाले स्थानीय प्रशासन और पुरातत्व विभाग के अधिकारी इस मामले के लिए जिम्मेदार हैं।
कानूनगो ने कहा कि इन अधिकारियों को उन अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए जिनके खिलाफ अब तक कोई मुकदमा नहीं बनाया गया। आयोग ने इसे गंभीर मामला मानते हुए तत्काल नोटिस जारी किया है। उन्होंने एक्स प्लेटफॉर्म पर ट्वीट करते हुए बताया कि मध्यप्रदेश के रायसेन में पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित किले की सीमाओं से निकटवर्ती आवासीय इलाकों में अवैध देसी तोपों के जरिए लोगों के जीवन को खतरे में डाला जा रहा है।
कानूनगो ने लिखा कि यह कार्य ईरान और रमजान के नाम पर भय फैलाने के लिए किया जा रहा है। साथ ही, महादेव मंदिर में दर्शन रोकने वाले आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया और स्थानीय प्रशासन के अधिकारी भी ऐसे अपराधियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने में तत्परता दिखाएँ।
राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के सदस्य कानूनगो ने कहा कि आयोग कार्रवाई के लिए नोटिस भेज रहा है, और इस मामले में अधिकारियों को अपने कर्तव्य का पालन न करने का हिसाब भी देना होगा। उन्होंने एक्स पर वीडियो भी साझा किया है, जिस पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। कानूनगो ने यह भी जोड़ा कि सरकारी नियमों और नौकरियों के तहत यह जिम्मेदारी अधिकारियों की है कि वे नियमानुसार कार्रवाई करें। इसके अलावा, उन्होंने उल्लेख किया कि अपराधियों ने इंस्टाग्राम पोस्ट में पुराने वीडियो भी शामिल किए हैं, जिन्हें FIR दर्ज करते समय ध्यान में रखना आवश्यक होगा।












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