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आगर मालवा में चैत्र माह की कृष्ण पक्ष दशमी पर शुक्रवार को महिलाओं ने बड़े श्रद्धा भाव के साथ दशामाता का पूजन किया। अपने परिवार की सुख-समृद्धि और गृह दशा में सुधार की कामना के लिए महिलाएं व्रत रखकर पीपल वृक्ष की परिक्रमा करती रहीं और विधि-विधान से पूजा-अर्चना की।
सुबह से ही नगर के शकर कुईया, छावनी और हनुमानगढ़ी समेत विभिन्न क्षेत्रों में स्थित पीपल, नीम और बरगद के वृक्षों के पास महिलाओं की भीड़ उमड़ गई। पारंपरिक वेशभूषा में सजी महिलाएं पूजा सामग्री लेकर पहुंचीं और वृक्षों की पूजा कर परिक्रमा करती रहीं। इस दौरान उन्होंने दशामाता की कथा भी श्रद्धापूर्वक सुनी और अपने परिवार की सुख-शांति के लिए प्रार्थना की।
यह धार्मिक पर्व न केवल आस्था का प्रतीक है, बल्कि इसमें महिलाएं अपने घरों की दशा सुधारने की कामना करती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दशामाता को मां पार्वती का स्वरूप माना जाता है। चैत्र माह की कृष्ण पक्ष दशमी तिथि पर दशामाता का पूजन करने से घर की नकारात्मक दशाएं दूर होती हैं और परिवार में सुख, समृद्धि तथा शांति बनी रहती है।
महिलाओं ने पूरे विधि-विधान से पूजन कर व्रत का पालन किया। दशामाता पूजन के दिन पीपल, नीम और बरगद जैसे तीन प्रमुख वृक्षों की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि इन वृक्षों की पूजा और परिक्रमा करने से घर-परिवार में आने वाली परेशानियां दूर होती हैं और सुख-समृद्धि का वास होता है।
पूजन के दौरान महिलाएं एक-दूसरे को व्रत की शुभकामनाएं भी देती रहीं। पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ इस धार्मिक पर्व को श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया, जिससे नगर में दिनभर धार्मिक वातावरण बना रहा।












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