Water Crisis Deepens in Sehore Villages: 150 Families Affected, Borewell Work Yet to Begin Despite Orders|सीहोर के गांवों में गहराया जल संकट: 150 परिवार प्रभावित, आदेश के बावजूद नलकूप खनन शुरू नहीं


सीहोर जिले के कई ग्रामीण इलाकों में गर्मी की शुरुआत के साथ ही पेयजल संकट तेजी से बढ़ता जा रहा है। स्थिति ऐसी बन गई है कि लोगों को रोजाना पीने के पानी के लिए जूझना पड़ रहा है। कई स्थानों पर हैंडपंप और ट्यूबवेल पूरी तरह सूख चुके हैं, जिससे ग्रामीणों की समस्याएं लगातार बढ़ रही हैं।

ग्राम चन्देरी के किसान एमएस मेवाड़ा के मुताबिक, इलाके के करीब 150 परिवार गंभीर जल संकट का सामना कर रहे हैं। खामलिया, नरेला, रायपुर, नयाखेड़ा और बड़बेली जैसे गांव सबसे अधिक प्रभावित हैं, जहां जल स्रोत पूरी तरह समाप्त हो चुके हैं।

पानी की कमी के चलते ग्रामीणों को लगभग दो किलोमीटर दूर जाकर झीरी खोदकर पानी लाना पड़ रहा है, जो साफ नहीं होता। वहीं, कई महिलाओं को रोजाना करीब 100 रुपये खर्च कर पानी खरीदना पड़ रहा है, जिससे उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।

इस समस्या को लेकर किसानों ने एक सप्ताह पहले लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (पीएचई) विभाग को ज्ञापन देकर गांवों में नलकूप खनन कराने की मांग की थी। इस पर भोपाल और सीहोर के प्रमुख अभियंताओं द्वारा जल्द काम शुरू करने के निर्देश भी जारी किए गए थे।

इसके बावजूद, एमएस मेवाड़ा के अनुसार ग्राम रोला, मानपुरा, पचामा, कुलासकलॉ, जमनी, खामलिया, नरेला, बरबेली, रायपुर, नयाखेड़ा और अमरोद सहित कई गांवों में अब तक नलकूप खनन का कार्य शुरू नहीं हो पाया है।

वहीं, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग ने जानकारी दी है कि ग्रीष्मकाल में पेयजल समस्याओं की निगरानी के लिए सीहोर के खंड और उपखंड स्तर पर सूखा राहत प्रकोष्ठ के तहत कंट्रोल रूम बनाए गए हैं। इन कंट्रोल रूम के जरिए शिकायतें दर्ज की जा रही हैं, कार्यवाही की जानकारी एकत्र की जा रही है और पेयजल व्यवस्था पर निगरानी रखी जा रही है।

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