बालाघाट जिले में फिजियोथेरेपी की एक छात्रा ने वारासिवनी स्थित जटाशंकर पैरामेडिकल इंस्टीट्यूट पर उसकी 56 हजार रुपये की छात्रवृत्ति निकालने का आरोप लगाया है। इस मामले को लेकर छात्रा ने प्रशासन से शिकायत कर जांच कराने और संस्थान के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। हालांकि संस्थान प्रबंधन ने इन आरोपों को निराधार बताया है।
जानकारी के अनुसार छात्रा आस्था नगपुरे मंगलवार को कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंची और प्रशासन को आवेदन देकर पूरे मामले की जांच की मांग की। छात्रा का कहना है कि उसने वर्ष 2022-23 में वारासिवनी के जटाशंकर पैरामेडिकल इंस्टीट्यूट में फिजियोथेरेपी कोर्स में प्रवेश लिया था। लगभग ढाई साल तक परीक्षाएं आयोजित नहीं होने के कारण उसने संस्थान से ट्रांसफर सर्टिफिकेट (टीसी) लेकर भोपाल के एक कॉलेज में दाखिला ले लिया।
छात्रा ने बताया कि पहले मिले टीसी में ‘परीक्षा में शामिल नहीं’ होने का उल्लेख था, जिसके कारण उसे दोबारा टीसी लेना पड़ा। इसके बाद छात्रवृत्ति पोर्टल पर उसे समस्या आने लगी।
आस्था नगपुरे के अनुसार छात्रवृत्ति पोर्टल पर अब भी उसका नाम वारासिवनी स्थित कॉलेज से जुड़ा हुआ दिखाई दे रहा है। इस वजह से वह भोपाल के कॉलेज से छात्रवृत्ति के लिए आवेदन नहीं कर पा रही है। जब उसने इस संबंध में संस्थान से संपर्क कर पोर्टल से नाम हटाने का अनुरोध किया, तो प्रबंधन की ओर से उससे 56 हजार रुपये की छात्रवृत्ति राशि जमा करने की बात कही गई।
छात्रा का आरोप है कि प्रवेश के समय संस्थान ने उससे 30 हजार रुपये के साथ-साथ 56 हजार रुपये की छात्रवृत्ति राशि भी पहले ही ले ली थी। उसने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की जांच कराई जाए और उसकी छात्रवृत्ति राशि वापस दिलाई जाए। छात्रा का कहना है कि यदि पोर्टल से उसका नाम नहीं हटाया गया तो वह भोपाल में बिना छात्रवृत्ति के अपनी पढ़ाई कैसे जारी रख पाएगी, यह चिंता का विषय है।
वहीं दूसरी ओर संस्थान प्रबंधक आशीष पारधी ने छात्रा द्वारा लगाए गए आरोपों से इनकार किया है। उनका कहना है कि प्रोफेशनल कोर्स में इस तरह की परिस्थितियां सामने आती हैं। उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा दी जाने वाली छात्रवृत्ति उसी संस्थान में पढ़ाई के लिए प्रदान की जाती है। यदि छात्रा किसी दूसरे कॉलेज में पढ़ाई करते हुए छात्रवृत्ति लेना चाहती है, तो उसे सरकार की ओर से दी गई छात्रवृत्ति वापस करनी होगी।












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