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टीकमगढ़। बालिका शिक्षा के क्षेत्र में ऐतिहासिक योगदान देने वाली परंपरा को आगे बढ़ाते हुए पद्मश्री सम्मानित शिक्षाविद् प्रोफेसर कृष्ण कुमार ने अपना पैतृक मकान सामाजिक संस्था ‘निरंतर’ को दान कर दिया है। यह दान उन्होंने अपनी मां कृष्णा कुमारी के उस सपने को साकार करने के उद्देश्य से किया है, जिसकी नींव वर्ष 1947 में रखी गई थी।
प्रो. कृष्ण कुमार ने बताया कि उनकी मां ने सितंबर 1947 में टीकमगढ़ में पहला बालिका विद्यालय शुरू किया था। उस दौर में बुंदेलखंड में बालिका शिक्षा अत्यंत सीमित थी और विद्यालय की शुरुआत मात्र तीन छात्राओं से हुई थी। पर्दा प्रथा के चलते बच्चियों को पर्दों वाली बैलगाड़ी (सिकरम) से स्कूल लाया जाता था। यह विद्यालय तत्कालीन टीकमगढ़ राजा के सहयोग से पीली कोठी क्षेत्र में स्थापित हुआ था।
समय के साथ शिक्षा के प्रति सामाजिक दृष्टिकोण बदला और उनकी मां के जीवनकाल में ही हजारों छात्राएं इस विद्यालय से शिक्षित हुईं।
भारत के प्रख्यात शिक्षाविद् प्रो. कृष्ण कुमार ने भारत सरकार के कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया है और शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया। शुक्रवार को टीकमगढ़ पहुंचकर उन्होंने अपना पैतृक मकान ‘निरंतर’ संस्था को सौंपते हुए कहा कि यह संस्था छात्राओं की शिक्षा और सशक्तिकरण के लिए निरंतर कार्य कर रही है, जिससे उनकी मां की विरासत को आगे बढ़ाया जा सकेगा।












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