
मध्य प्रदेश के 6.5 लाख से ज्यादा सरकारी कर्मचारियों के लिए 1 जनवरी 2026 से छुट्टियों का पूरा कैलेंडर बदलने जा रहा है, पुराने 1977 के मध्यप्रदेश अवकाश नियम की जगह अब मध्यप्रदेश सिविल सेवा (अवकाश) नियम 2025 लागू होंगे, जो केंद्र सरकार के नियमों के करीब हैं।

नए नियमों के अनुसार बीमारी और मातृत्व अवकाश लेना अब अधिक सुविधाजनक होगा और इसके दुरुपयोग पर भी नियंत्रण होगा, अधिकारियों को रोस्टर बनाना अनिवार्य होगा ताकि छुट्टी देने में मनमानी न हो। नए नियम जेंडर न्यूट्रल बनाए गए हैं, जिसमें सरोगेसी और सिंगल फादर जैसी परिस्थितियों के लिए प्रावधान जोड़े गए हैं। साल की शुरुआत में 15 दिन की EL (अर्निंग लीव) खाते में क्रेडिट होगी और साल के मध्य में फिर 15 दिन जुड़ेंगे, नई जॉइनिंग करने वाले कर्मचारियों को भी आनुपातिक EL मिलेगी। शिक्षकों और प्रोफेसरों को साल में 10 दिन का अर्जित अवकाश मिलेगा। ड्यूटी के दौरान घायल होने पर विशेष मेडिकल लीव 2 साल तक मिलेगी, जिसमें पहले 180 दिनों का पूरा वेतन और शेष अवधि में आधा वेतन मिलेगा। आकस्मिक अवकाश (CL) के साथ मेडिकल लीव अब आसानी से जुड़ सकेगी। प्रोबेशनर्स को भी नियम के अनुसार अवकाश की पात्रता होगी। चाइल्ड केयर लीव के तहत 730 दिन का अवकाश मिलेगा, पहले साल पूरा वेतन और अगले साल 80 प्रतिशत वेतन दिया जाएगा। नए नियम स्पष्ट करते हैं कि अवकाश अधिकार नहीं है लेकिन मनमानी भी नहीं हो सकती, अधिकारियों को रोस्टर बनाना अनिवार्य है और कोई कर्मचारी 5 वर्ष से अधिक अवकाश पर नहीं रह सकता।












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