Mafia Seizes Crocodile Habitats: Supreme Court Takes Suo Motu Cognizance of Illegal Sand Mining in Chambal Sanctuary|घड़ियालों के घर पर माफिया का कब्जा: चंबल सेंचुरी में अवैध रेत खनन पर सुप्रीम कोर्ट ने लिया स्वत: संज्ञान, अब CJI करेंगे सुनवाई

राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल वन्यजीव अभयारण्य में हो रहे अवैध रेत खनन पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने मीडिया रिपोर्ट और सीएसआर (CSR) की रिपोर्टों के आधार पर मामले का स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लिया है।

कोर्ट ने साफ कहा कि संरक्षित क्षेत्रों में पूर्ण प्रतिबंध के बावजूद रेत का अवैध खनन और परिवहन जारी है, जो लुप्तप्राय प्रजातियों के लिए खतरा बन रहा है।

सुनवाई के दौरान जस्टिस विक्रम नाथ ने गंभीर टिप्पणी की कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा छोड़े गए क्षेत्र भी अब अवैध खनन की चपेट में आ गए हैं। खनन माफियाओं के डर और प्राकृतिक आवास के विनाश के कारण घड़ियालों को विस्थापित होना पड़ रहा है। जस्टिस संदीप मेहता ने कहा, “हमने देखा है कि जिन संरक्षित क्षेत्रों में घड़ियाल संरक्षण कार्यक्रम चल रहा है, वहां अंधाधुंध खनन हो रहा है। इसके कारण घड़ियालों को विस्थापित होना पड़ रहा है। मामला अब उचित दिशा-निर्देशों के लिए प्रधान न्यायाधीश (CJI) के समक्ष भेजा जाएगा।”

चंबल अभयारण्य का 435 किलोमीटर लंबा क्षेत्र घड़ियालों के अलावा रिवर डॉल्फिन, दुर्लभ कछुओं और पक्षियों का भी घर है। कोर्ट ने चिंता जताई कि संरक्षित क्षेत्र में रेत का परिवहन और खनन पूरी तरह प्रतिबंधित है, फिर भी यह धड़ल्ले से जारी है। रेत पूरे ईको-सिस्टम का आधार है। इसके हटने से घड़ियालों के प्रजनन और रहने की जगह खत्म हो रही है। अवैध खनन न केवल वन्यजीवों बल्कि पूरे पर्यावरण के संतुलन को बिगाड़ रहा है।

1979 में अधिसूचित राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के त्रिकोणीय क्षेत्र (Trisection) पर स्थित है। इसे मुख्य रूप से लुप्तप्राय घड़ियालों को बचाने के लिए बनाया गया था, लेकिन अब यह माफियाओं की शरणस्थली बनता जा रहा है।

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