
खरगोन में शनिवार को गणगौर पर्व का शुभारंभ हर्षोल्लास के साथ हुआ। ब्रह्म मुहूर्त में माता की बाड़ी के पट खोले गए, जहां पंडितों, पुरोहितों, समाज प्रतिनिधियों और पटेलों ने विधि-विधान से पूजन और दर्शन किए। इसके बाद श्रद्धालुओं ने कतारबद्ध होकर माता के प्रतीक माने जाने वाले ज्वारों की पूजा-अर्चना की।
पूजा-अर्चना संपन्न होने के बाद ज्वारों की पाट स्थापना की गई। इसके पश्चात श्रद्धालु ढोल-ताशों की धुन पर नाचते-गाते हुए चल समारोह के रूप में इन ज्वारों को अपने-अपने घरों तक लेकर गए। शहर में 25 से अधिक बाड़ी बोई गई हैं, जहां यह धार्मिक परंपरा निभाई जा रही है।
अगले दो दिनों तक श्रद्धालु इन ज्वारों की भक्तिभाव से सेवा करेंगे। परंपरा के अनुसार दूसरे दिन मनुहार कर इन्हें रोका जाएगा, जबकि तीसरे दिन विदाई के साथ ज्वारों का विसर्जन किया जाएगा।
यह 10 दिवसीय उत्सव चैत्र कृष्ण पक्ष की ग्यारस से बाड़ी स्थापना के साथ प्रारंभ हुआ था। सात दिनों तक पुरोहितों द्वारा इनकी सेवा की गई, जिसके बाद बाड़ी के पट श्रद्धालुओं के लिए खोले गए। निमाड़ क्षेत्र के इस प्रसिद्ध गणगौर पर्व में तीन दिनों तक माता गौरी और ईसर यानी भगवान शिव की आराधना की जाती है। पंडित श्याम बडोले के अनुसार, यह पर्व धार्मिक आस्था और परंपराओं का महत्वपूर्ण प्रतीक है, जिसमें श्रद्धालु पूरे समर्पण के साथ भाग लेते हैं।
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