Allegations of Police Inaction in Anuppur: Victim Complains to SP, Says Constables Are Protecting the Accused|अनूपपुर में पुलिस पर कार्रवाई न करने का आरोप: पीड़ित ने एसपी से की शिकायत, कहा—सिपाही आरोपी को बचा रहे


अनूपपुर जिले के ताराडांड गांव निवासी चैतू सिंह ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि उन पर हुए जानलेवा हमले के बावजूद आरोपियों के खिलाफ उचित कार्रवाई नहीं की जा रही है। इस संबंध में उन्होंने मंगलवार को पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में पुलिस कर्मियों पर सरकारी पद का दुरुपयोग करने और मामले को दबाने जैसे आरोप लगाए गए हैं। साथ ही उन्होंने भविष्य में किसी भी अप्रिय घटना की जिम्मेदारी तय करने की भी मांग की है।

चैतू सिंह अनुसूचित जनजाति वर्ग से आते हैं और अपनी जमीन पर खेती करते हैं। उन्होंने बताया कि 26 दिसंबर 2025 को दोपहर लगभग 3 से 4 बजे के बीच वे अपने खेत के पास लगे बिजली के खंभे पर मरम्मत का कार्य कर रहे थे। इसी दौरान मंजू गौतम वहां पहुंची और उन्हें जातिसूचक तथा अपमानजनक गालियां देने लगीं। कुछ देर बाद लल्लू गौतम और उनका पुत्र प्रशांत गौतम भी मौके पर आ गए। पीड़ित के अनुसार तीनों ने मिलकर उन पर हमला कर दिया और उन्हें जान से मारने की धमकी दी। मारपीट के दौरान चैतू सिंह बेहोश हो गए।

पीड़ित का आरोप है कि घटना के बाद लल्लू गौतम ने डायल 112 पर फोन किया। सूचना मिलने पर मौके पर पहुंची 112 वाहन में चालक प्रदीप गौतम और एक अन्य आरक्षक मौजूद थे। चैतू सिंह का कहना है कि इन पुलिसकर्मियों ने आरोपियों के साथ मिलीभगत करते हुए उन्हें इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाने के बजाय मरा हुआ समझकर वहीं छोड़ दिया।

घटना के प्रत्यक्षदर्शी ज़ेहर सिंह ने पूरी स्थिति देखी। बाद में उन्होंने ही चैतू सिंह को होश में लाया और उन्हें सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया। इसके बाद जिला अस्पताल अनूपपुर में उनका चिकित्सकीय परीक्षण कराया गया, जहां जांच में उनकी एक पसली टूटने और शरीर में गंभीर अंदरूनी चोटें होने की पुष्टि हुई।

चैतू सिंह का कहना है कि इस घटना के बाद से वे भय, पीड़ा और मानसिक तनाव में हैं। उन्होंने यह भी बताया कि इससे पहले भी आरोपियों के खिलाफ अजाक थाने में शिकायत की गई थी, लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। पीड़ित के अनुसार इसी कारण आरोपियों के हौसले बढ़ गए हैं।

अपनी शिकायत में चैतू सिंह ने स्पष्ट किया है कि यदि भविष्य में उनके या उनके परिवार के किसी भी सदस्य के साथ कोई अप्रिय या जानलेवा घटना होती है, तो इसके लिए लल्लू गौतम, प्रशांत गौतम, मंजू गौतम, 112 वाहन चालक प्रदीप गौतम और वाहन में मौजूद अज्ञात आरक्षक जिम्मेदार होंगे।

उन्होंने मांग की है कि सभी आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत तत्काल एफआईआर दर्ज कर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही प्रत्यक्षदर्शी ज़ेहर सिंह का बयान प्रकरण में दर्ज किया जाए और उन्हें तथा उनके परिवार को सुरक्षा प्रदान की जाए।

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