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राजगढ़ जिले की खिलचीपुर नगर परिषद में प्रशासनिक अस्थिरता सामने आई है। मार्च 2024 से दिसंबर 2025 के बीच केवल 21 महीनों में मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) आठ बार बदले जा चुके हैं, जिससे नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
वर्तमान में सारंगपुर नगर पालिका की सीएमओ ज्योति सुनहरे को सारंगपुर के साथ-साथ खिलचीपुर नगर परिषद का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। इससे पहले अलग-अलग अवधि में अनिल जोशी और अशोक पांचाल को बार-बार सीएमओ की जिम्मेदारी दी गई। कुछ समय के लिए राजगढ़ नगर परिषद के सीएमओ पवन अवस्थी और माचलपुर नगर परिषद के सीएमओ देवेंद्र वत्स को भी खिलचीपुर का प्रभार दिया गया।
नगर परिषद उपाध्यक्ष प्रतिनिधि विजय शर्मा बंटी ने आरोप लगाया है कि भोपाल में बैठे एक अधिकारी के हस्तक्षेप के कारण यह स्थिति बनी हुई है। उन्होंने कहा कि 60 किलोमीटर दूर सारंगपुर की सीएमओ को खिलचीपुर का प्रभार देने से नगर परिषद के कामकाज पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। वर्तमान सीएमओ के कार्यालय में नियमित रूप से उपस्थित न रहने के कारण कई कार्य लंबित हैं।
नगर में गाडगंगा नदी पर बने छोटे पुल के पटिये अब तक नहीं लगाए जा सके हैं। इसके अलावा, नालों के पटिये भी अधूरे पड़े हैं, जिससे नागरिकों को परेशानी हो रही है। अमृत योजना, मुख्यमंत्री आधारभूत संरचना विकास योजना और पीएम स्वनिधि जैसी महत्वपूर्ण योजनाएं भी प्रभावित हुई हैं। पीएम स्वनिधि योजना में नगर परिषद की प्रगति 8 प्रतिशत से कम बताई जा रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बार-बार सीएमओ बदलने और अतिरिक्त प्रभार की व्यवस्था के चलते न तो योजनाओं की उचित निगरानी हो पा रही है और न ही जिम्मेदारी तय हो रही है। नागरिकों ने शासन से मांग की है कि खिलचीपुर नगर परिषद में जल्द एक स्थायी और पूर्णकालिक सीएमओ की नियुक्ति की जाए, ताकि विकास कार्यों को गति मिल सके और योजनाओं का लाभ आमजन तक पहुंच सके।












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