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वर्धमान जिनिंग फैक्ट्री में किसान और सीसीआई के अधिकारियों के बीच कहासुनी हो गई।
खंडवा में भारत कपास निगम यानी सीसीआई के द्वारा समर्थन मूल्य पर कपास की खरीदी की जा रही हैं। इस दौरान किसानों ने सीसीआई पर अनियमितता का आरोप लगाया है। किसानों का कहना है कि, मंडी में उपज की नीलामी के दौरान ही नमी चेक करके उपज के दाम तय होते है। इसके ब
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शुक्रवार को इंदौर रोड़ पर छैगांवदेवी के पास स्थित वर्धमान जिनिंग फैक्ट्री पर किसानों और सीसीआई के अधिकारियों के बीच कहासुनी हो गई। मौके पर भारतीय किसान संघ के पदाधिकारी भी पहुंचे। किसानों का कहना था कि जब मंडी में उपज की नीलामी हो गई, वहां कोई गड़बड़ी नहीं मिली। फिर फैक्ट्री लाकर तौलकांटा होने के बाद वाहन खाली होता है, तब सीसीआई के अधिकारी उपज में ज्यादा नमी बताते है और उपज का कम दाम तय कर देते है। या फिर रिजेक्ट कहकर वाहन को वापस ले जाने की बात कहते हैं।
पैसे की डिमांड करते है, न देने पर ज्यादा नमी बताते है
सुलगांव से आए किसान दीलिप बोरदिया ने बताया कि, मंडी में नीलामी के दौरान मेरी उपज में कोई मिस्टेक नहीं बताई गई। फैक्ट्री में गाड़ी खाली करने आए तो ग्रेडर ने गाड़ी रोक दी। मैंने कहा कि इसमें कोई मिस्टेक नहीं है, किसान की गाड़ी है। लेकिन उन्होंने गाड़ी खाली करने से मना कर दिया। ग्रेडर ने कहा कि इसमें ज्यादा नमी है। मुझे पता चला है कि, 1500 रूपए देने पर गाड़ी खाली कर दी जाती हैं।
किसान नेता बोले- 1200 रूपए तक घटा दिए भाव
भारतीय किसान संघ के जिला महामंत्री सुभाष पटेल ने कहा कि, इस महीने में कपास की उपज सूखी है, बावजूद किसानों को परेशान किया जा रहा है। सभी जिलों में व्यवस्था ठीक चल रही है। सिर्फ खंडवा जिले में सीसीआई के अधिकारी मनमानी करते है। व्यापारियों की सभी गाड़ियां खाली हो जाती है, सिर्फ किसानों को जबरन परेशान किया जाता है।
मैंने यहां आकर देखा कि एक गाड़ी में 10 क्विंटल कपास है, मंडी में उसका मूल्य 7800 रूपए प्रति क्विंटल तय हो चुका है। यहां खाली कराने आए तो अधिकारी उसका मूल्य 6600 रूपए प्रति क्विंटल तय कर रहे हैं। सीसीआई के अधिकारी किसानों के साथ जबरदस्ती कर रहे हैं। यह उनका रोजाना का काम हो गया है।
सीसीआई इंचार्ज बाेले- आरोप निराधार, गुणवत्ता में कमी
भारत कपास निगम के जिला इंचार्ज चंद्रकिशोर साकोमे का कहना है कि, मंडी में नीलामी के दौरान किसान वाहन में रखी उपज को दो चार फीट तक खुदवाते है। वहां कपास का आंकलन नहीं हाे पाता है। सीसीआई का मापदंड है कि 8 से 12 प्रतिशत नमी का कपास लेना। गुल्लियां, कलीयुक्त कपास हम लोग नहीं लेते है। यह हमारे एफक्यू में नहीं आता है।
यहां अनलोडिंग के दौरान कपास ज्यादा नमी वाला निकलता है। किसान फिर हंगामा करता है। वे लोग किसान संगठनों से दबाव बनाते हैं। लेकिन गुणवत्ता मापदंड से हटकर कपास खरीदने पर हमारे उच्च अधिकारी हमें मेमो जारी कर देते है। बाकी हमारे द्वारा पंजीयनकर्ता का ही कपास लिया जाता है। वो व्यापारी है या किसान इसकी पहचान तो नहीं कर सकते है। मंडी स्टाफ की मौजूदगी में कपास की नीलामी होती है।
डीडीए कृषि ने कहा- मामले की जांच की जा रही
डीडीए कृषि नितेश यादव ने बताया कि, किसान और किसान संगठनों की शिकायत मिलने पर जिनिंग फैक्ट्री में आए थे। यहां किसानों की शिकायत सुनी गई है, इसे लेकर सीसीआई के अधिकारियों को निर्देश दिए है कि वे मंडी में उपज की नीलामी के दौरान ही आश्वस्त हो जाए कि उपज गुणवत्ता मापदंडों के अनुसार है या नहीं।
मंडी के बाद यहां लाकर उपज को गुणवत्ता के विपरित बताना गलत है। किसानों से रूपए मांगने और व्यापारियों की उपज तौलने के आरोपों को लेकर जांच करेंगे। इसके बाद वरिष्ठ अधिकारियों को मामले से अवगत कराएंगे।












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