ग्वालियर के बेहट में 101वें तानसेन समारोह के अंतिम दिन संगीत सभा का आयोजन हुआ, जिसमें सुर, साधना और श्रद्धा का अनुपम संगम देखा गया। भगवान भोले के मंदिर और झिलमिल नदी के पास स्थित ध्रुपद केन्द्र के मुक्ताकाश मंच पर प्रस्तुतियों ने बेहट को जीवंत संगीत–तीर्थ में बदल दिया।

सभा का शुभारंभ परंपरा अनुसार ध्रुपद के मंगल गान “बाजे डमरू हर कर बाजे” से हुआ। पखावज पर जगत नारायण शर्मा की संगत और अनुज प्रताप सिंह के निर्देशन में विद्यार्थियों ने राग गुनकली में प्रस्तुति दी। इसके बाद विशाल मोघे (ग्वालियर–पुणे) ने ‘डुलिया ने आवो मोरे बाबुल’ और अन्य पारंपरिक रचनाओं के माध्यम से भाव, लय और विस्तार का संतुलित प्रदर्शन किया।
वायलिन वादन में मिलिंद रायकर (मुंबई) ने राग शुद्ध सारंग और राग पहाड़ी की मधुर धुन प्रस्तुत की। तबले पर हितेंद्र दीक्षित की संगत ने वादन को और प्रभावशाली बनाया। सभा का समापन ध्रुपद गायन पर हुआ, जिसमें ध्रुपद केंद्र की युवा गायिका योगिनी तांबे ने गंभीर और ओजस्वी गायन से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

सभा में जिला पंचायत अध्यक्ष दुर्गेश कुंअर सिंह जाटव, कांग्रेस विधायक साहब सिंह गुर्जर, बीज निगम के पूर्व अध्यक्ष महेन्द्र सिंह यादव, उस्ताद अलाउद्दीन खां संगीत एवं कला अकादमी के निदेशक प्रकाश सिंह ठाकुर, एसडीएम सूर्यकांत त्रिपाठी सहित अन्य अधिकारी और बड़ी संख्या में रसिक मौजूद रहे। कुछ विदेशी संगीत प्रेमियों ने भी इस आयोजन का आनंद लिया।
सभा ने तानसेन की जन्मस्थली को संगीत प्रेमियों के लिए एक जीवंत और आध्यात्मिक केंद्र के रूप में प्रदर्शित किया।












Leave a Reply